Ahluwalia Contracts India Ltd ने दमदार फाइनेंशियल ईयर के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में **11.4%** की बढ़त दर्ज की गई है, वहीं नेट प्रॉफिट **31.2%** बढ़कर **₹264 करोड़** हो गया है। कंपनी ने शेयरधारकों के लिए **35%** डिविडेंड का भी ऐलान किया है।
Ahluwalia Contracts India Ltd के FY26 के नतीजे
कंपनी के स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 11.4% की ग्रोथ देखी गई और यह ₹4,565.20 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹4,098.62 करोड़ था। वहीं, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 31.2% की जोरदार बढ़ोतरी हुई, जो ₹264.32 करोड़ तक पहुंच गया। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह ₹201.51 करोड़ था।
सब्सिडियरी कंपनियों का होगा मर्जर
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने पांच पूरी तरह से अपनी सहायक कंपनियों - Dipesh Mining Private Limited, Jiwanjyoti Traders Private Limited, Premsagar Merchants Private Limited, Paramount Dealcomm Private Limited, और Splendor Distributors Private Limited - के विलय (amalgamation) को भी मंजूरी दे दी है। इस कदम का मकसद कंपनी के ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करना है। कंपनी ने नए लेबर कोड्स के चलते कर्मचारी लाभों के लिए ₹1.12 करोड़ की अतिरिक्त प्रोविजन (provision) भी दर्ज की है।
निवेशकों के लिए अच्छी खबर
कंपनी का यह मजबूत फाइनेंशियल परफॉरमेंस (performance) कारोबार के स्वस्थ विस्तार और कुशल ऑपरेशन्स का संकेत देता है। प्रस्तावित 35% डिविडेंड (यानी ₹0.70 प्रति शेयर) शेयरधारकों के लिए एक अच्छा रिटर्न है। सब्सिडियरी कंपनियों का विलय, अगर सफल रहा, तो बेहतर ऑपरेशनल तालमेल (synergies) और एक सरल कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर (structure) का कारण बन सकता है, जिससे लंबे समय में शेयरधारकों के वैल्यू में इजाफा हो सकता है।
आगे क्या?
कंपनी अब NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) दिल्ली और कोलकाता में फर्स्ट मोशन पिटीशन (first motion petition) दाखिल करने सहित आवश्यक रेगुलेटरी फाइलिंग्स (regulatory filings) की ओर बढ़ेगी। निवेशक इस प्रक्रिया के सुचारू समापन का इंतजार करेंगे। कंपनी का फोकस लगातार ग्रोथ और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (project execution) पर बना रहेगा।
जोखिम (Risks to Watch)
हालांकि कंपनी का प्रदर्शन मजबूत है, लेकिन सब्सिडियरी कंपनियों के विलय की प्रक्रिया का सफल समापन और नए लेबर कोड्स का एकीकरण कुछ ऐसे पहलू हैं जिन पर नजर रखनी होगी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (infrastructure projects) में एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risks) भी भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
