Ahluwalia Contracts (India) Ltd ने FY26 के लिए धमाकेदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **31.7%** बढ़कर **₹265.86 करोड़** पर पहुंच गया है, साथ ही कंपनी ने **₹0.70** प्रति शेयर के डिविडेंड का भी ऐलान किया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी के रेवेन्यू में भी 11.38% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो ₹4,565.20 करोड़ पर पहुंच गया है। कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि EBITDA मार्जिन 8.34% से बढ़कर 9.5% हो गया है। साथ ही, कंपनी का अर्निंग पर शेयर (EPS) पिछले साल के ₹30.17 से बढ़कर ₹39.69 पर पहुंच गया है।
ऑर्डर बुक और भविष्य की राह
कंपनी के पास वर्तमान में ₹21,096.3 करोड़ का अन-एग्जीक्यूटेड ऑर्डर बुक है, जो 16 राज्यों में 53 प्रोजेक्ट्स पर फैला हुआ है। यह कंपनी की लंबी अवधि के रेवेन्यू विजिबिलिटी को और मजबूत बनाता है। इसके अलावा, कंपनी अपनी 5 पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनियों का विलय कर रही है, जिससे ऑपरेशनल सिनर्जी और गवर्नेंस में सुधार आने की उम्मीद है।
रेटिंग और मैनेजमेंट
CARE Ratings ने कंपनी की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर भरोसा जताते हुए 'CARE AA-' (स्टेबल) और 'CARE A1+' रेटिंग को बरकरार रखा है। मैनेजमेंट में निरंतरता बनाए रखते हुए, कंपनी ने शौभित उप्पल को डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और विकास अहलूवालिया को होल-टाइम डायरेक्टर के रूप में फिर से नियुक्त किया है।
निवेशकों के लिए जोखिम
हालांकि कंपनी का ऑर्डर बुक काफी मजबूत है, लेकिन निवेशकों को सेंट्रल विस्टा और एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन की रफ्तार पर नजर रखनी चाहिए। रॉ मटेरियल की बढ़ती कीमतों और प्रोजेक्ट देरी का असर मार्जिन्स पर पड़ सकता है।
