Aeroflex Enterprises ने FY26 के लिए **19.8%** का शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज किया है, जो ₹726.10 करोड़ रहा। कंपनी ने **20%** डिविडेंड का भी ऐलान किया है। साथ ही, M.R. Organisation में अपनी हिस्सेदारी **₹227.42 करोड़** में बेचकर अपनी इं.क्यूबेशन स्ट्रेटेजी को साबित किया है।
Aeroflex Enterprises का दमदार प्रदर्शन, FY26 में रेवेन्यू 19.8% बढ़ा
कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू: ₹726.10 करोड़ | प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT): ₹85.33 करोड़
निवेशकों के लिए खास: दमदार रेवेन्यू ग्रोथ और सब्सिडियरी की बिक्री से कंपनी को फायदा, लेकिन टैक्स देनदारियों पर नजर
**क्या हुआ?
Aeroflex Enterprises Ltd. (पहले Sat Industries Ltd.) ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 19.8% बढ़कर ₹726.10 करोड़ हो गया है। वहीं, कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) भी बढ़कर ₹85.33 करोड़ पर पहुंच गया है। नतीजों के साथ ही, Aeroflex ने 20% (₹0.40 प्रति शेयर) डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनी ने M.R. Organisation (MRO) में अपनी 68% हिस्सेदारी ₹227.42 करोड़ में बेचकर डील पूरी कर ली है।
**यह क्यों महत्वपूर्ण है?
रेवेन्यू और प्रॉफिट में यह दमदार ग्रोथ कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट में पकड़ को दिखाती है। MRO की सफल बिक्री Aeroflex की उस स्ट्रेटेजी को पुख्ता करती है जिसके तहत वह कंपनियों को इनक्यूबेट करती है और फिर मुनाफे पर बेच देती है। इससे कंपनी को अच्छी खासी लिक्विडिटी और कैपिटल गेन मिला है। डिविडेंड का ऐलान शेयरधारकों को इनाम देता है, वहीं डेटा सेंटर कूलिंग जैसे हाई-ग्रोथ एरिया में कंपनी का विस्तार भविष्य की क्षमता की ओर इशारा करता है।
**बैकग्राउंड क्या है?
Aeroflex Enterprises अपनी स्ट्रेटेजी को लगातार विकसित कर रही है, जिसका फोकस 'Ecosystem of Enduring Enterprises' पर है। इसमें कैश जेनरेट करने वाले बिजनेस को सपोर्ट करने के साथ-साथ हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स में निवेश भी शामिल है। कंपनी फ्लो सॉल्यूशंस, इनोवेटिव पैकेजिंग, इंजीनियरिंग सर्विसेज और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे विभिन्न सेगमेंट्स में काम करती है।
**अब क्या बदलेगा?
MRO, जो कि एक मैच्योर इंजीनियरिंग सर्विसेज बिजनेस है, की बिक्री से कंपनी को भारी कैश मिला है और उसकी इनक्यूबेशन स्ट्रेटेजी से रिटर्न भी मिला है। इस कैपिटल का इस्तेमाल हाई-ग्रोथ वेंचर्स में किया जा सकता है या बैलेंस शीट को मजबूत करने में। डेटा सेंटर लिक्विड-कूलिंग सॉल्यूशंस में कंपनी का प्रवेश उसे तेजी से बढ़ते टेक्नोलॉजिकल सेगमेंट में स्थापित करता है।
**जोखिम क्या हैं?
कंपनी के सामने कुछ चिंताएं भी हैं, जैसे पिछले फाइनेंशियल इयर्स के पेंडिंग GST और इनकम टैक्स डिमांड से जुड़ी कंटिंजेंट लायबिलिटी, जिन पर कंपनी केस लड़ रही है। इसके अलावा, हाल के कैपिटल एक्सपेंडिचर के चलते डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन चार्ज में ₹32.96 करोड़ की बढ़ोतरी हुई, जिसका असर प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ा।
**आगे क्या देखना है?
निवेशकों को डेटा सेंटर कूलिंग सॉल्यूशंस बिजनेस के सफल इंटीग्रेशन और ग्रोथ पर नजर रखनी चाहिए। स्टार्टअप पोर्टफोलियो का प्रदर्शन, जिसमें नए निवेश और एग्जिट शामिल हैं, वह भी महत्वपूर्ण होगा। टैक्स संबंधी कंटिंजेंट लायबिलिटीज के समाधान पर लगातार नजर रखने की सलाह दी जाती है।
