Aequs के FY26 नतीजे: रेवेन्यू बढ़ा, पर नुकसान भी बढ़ा
Aequs Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के अपने नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में पिछले साल के मुकाबले 33% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹12,304 मिलियन पर पहुंच गया। वहीं, कंपनी की चौथी तिमाही (Q4 FY26) का रेवेन्यू भी 47% बढ़कर ₹3,671 मिलियन रहा।
रेवेन्यू में तेजी, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव
कंपनी के एयरोस्पेस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली। FY26 में ऑपरेशन्स से रेवेन्यू ₹12,304 मिलियन रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹9,246 मिलियन से काफी ज्यादा है। लेकिन, इस रेवेन्यू ग्रोथ के साथ-साथ कंपनी का घाटा भी बढ़ा है। FY26 में Aequs को ₹1,133 मिलियन का नेट लॉस हुआ, जो FY25 के ₹1,024 मिलियन के लॉस से ज्यादा है। चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी ₹541 मिलियन का नेट लॉस दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹90 मिलियन का प्रॉफिट हुआ था।
ग्रोथ के मुख्य कारण और मार्जिन पर असर
Aequs के एयरोस्पेस सेक्टर में मजबूत मांग बनी हुई है, जहां कंपनी के पास USD 889 मिलियन का बड़ा ऑर्डर बुक है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट ने भी तेजी से ग्रोथ दिखाई है, FY26 में इसमें 84% की साल-दर-साल बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इस ग्रोथ के बावजूद, Aequs के EBITDA मार्जिन में बड़ी गिरावट आई है। Q4 FY26 में मार्जिन घटकर 9% रह गया, जो Q4 FY25 में 17% था। यह गिरावट नए ऑपरेशन्स, खासकर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस में बढ़ती लागतों को दर्शाती है।
रणनीतिक विस्तार और निवेश
Aequs अपने एयरोस्पेस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स दोनों क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। कंपनी ने तमिलनाडु और कर्नाटक की सरकारों के साथ समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों के तहत, एयरोस्पेस इकोसिस्टम विकसित करने और ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाने के लिए क्रमशः ₹1,900 करोड़ और ₹2,856 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
फिलहाल के नतीजे Aequs के लिए, खासकर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स डिवीजन में, गहन निवेश और ऑपरेशनल डेवलपमेंट का दौर दिखा रहे हैं। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी अपने बड़े रेवेन्यू ग्रोथ को प्रॉफिट में कैसे बदल पाती है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट की प्रगति, कुल प्रॉफिटेबिलिटी पर इसका असर और नई सुविधाओं के उपयोग की दक्षता जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर नजर रखनी होगी। आने वाली तिमाहियों में लागतों को मैनेज करना और EBITDA मार्जिन में सुधार करना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों के साथ हुए बड़े MoUs का अमल कंपनी की भविष्य की ग्रोथ की संभावनाओं को समझने में मदद करेगा।
