Advait Energy Transitions का दमदार प्रदर्शन: FY26 में रिकॉर्ड कमाई और एनर्जी ट्रांज़िशन पर फोकस
Advait Energy Transitions Ltd. ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (FY26) के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस साल ₹714.52 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल FY25 के ₹397.66 करोड़ के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में भी जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, जो FY26 में ₹58.08 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹33.24 करोड़ था।
निवेशकों को डिविडेंड का तोहफा और मजबूत ऑर्डर बुक
कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को देखते हुए, मैनेजमेंट ने शेयरधारकों को ₹2 प्रति इक्विटी शेयर का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। इसके अलावा, कंपनी के पास ₹1,304 करोड़ का एक मजबूत ऑर्डर बुक भी है, जो आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ की संभावनाओं को और पुख्ता करता है।
एनर्जी ट्रांज़िशन की ओर स्ट्रैटेजिक कदम
ये नतीजे Advait Energy Transitions के एनर्जी ट्रांज़िशन सेक्टर में बढ़ते फोकस को दर्शाते हैं। बढ़ती मांग के अनुरूप, कंपनी ने सौर EPC, BESS मैन्युफैक्चरिंग, कार्बन सॉल्यूशंस और एसेट-बेस्ड बिजनेस के लिए नई सब्सिडियरीज़ बनाई हैं। FY25 में ₹397.66 करोड़ का रेवेन्यू और ₹33.24 करोड़ का PAT दर्ज करने वाली कंपनी ने इस साल ग्रोथ की रफ़्तार काफी तेज कर दी है।
भविष्य की योजनाओं पर बड़ा निवेश
Advait Energy Transitions, FY27 के लिए ₹300 करोड़ से ₹350 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) की योजना बना रही है। इस फंड का उपयोग धूलेरा के पास एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी (जो Q4 FY27 तक चालू हो जाएगी) के विकास में किया जाएगा। साथ ही, BESS (2.5 GWh) और इलेक्ट्रोलाइज़र (100 MW) में भी निवेश किया जाएगा। इन रणनीतिक कदमों से कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में क्षमताएं और मजबूत होंगी, जिससे भविष्य में रेवेन्यू और प्रॉफिट में और वृद्धि की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
निवेशकों को कंपनी के ऑपरेटिंग कैश फ्लो पर नज़र रखनी चाहिए, जो FY26 में ₹5.82 करोड़ रहा, यह PAT से कम है। मैनेजमेंट का कहना है कि यह तेजी से बढ़ते रेवेन्यू के वर्किंग कैपिटल साइकल्स का नतीजा है। कंपनी की आक्रामक विस्तार योजनाएं और बड़े Capex के लिए भविष्य में अतिरिक्त कर्ज या इक्विटी की आवश्यकता हो सकती है, जिसका असर शेयरधारक वैल्यू पर पड़ सकता है। इसके अलावा, कुछ प्रोडक्ट्स (जैसे OPGW) में कमोडिटी प्राइस वोलेटिलिटी का जोखिम भी है, जिनके लिए प्राइस-पास-थ्रू क्लॉज नहीं हैं।
