APL Apollo Tubes ने Q2 FY27 में **9,60,000 टन** की बिक्री दर्ज की है और **₹6,000 प्रति टन** का EBITDA बनाए रखा है। घरेलू स्टील की कमी और एक्सपोर्ट चुनौतियों के बीच कंपनी अब हाई-मार्जिन ब्रांडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है।
मुनाफे को बचाने की रणनीति
कंपनी ने अपने ब्रांडेड और रूफिंग प्रोडक्ट्स की ओर रुख किया है ताकि मार्केट की मौजूदा चुनौतियों के बीच मुनाफा बरकरार रहे। घरेलू स्तर पर स्टील की कमी को देखते हुए मैनेजमेंट ने लो-मार्जिन वाले बिजनेस से दूरी बनाना ही बेहतर समझा है। वर्तमान में कंपनी ₹1,600 करोड़ की नेट कैश पोजीशन के साथ काफी मजबूत स्थिति में है।
क्यों है यह अहम?
मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक अस्थिरता और महंगे फ्रेट कॉस्ट के चलते कंपनी के एक्सपोर्ट पर दबाव जरूर है, लेकिन घरेलू मार्केट में डिमांड अभी भी मजबूत बनी हुई है। कंपनी का मानना है कि पावर कॉस्ट को मौजूदा ₹6.2-6.3 प्रति यूनिट से घटाकर अगले साल तक ₹5 प्रति यूनिट तक लाने से मुनाफे में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
भविष्य की योजनाएं
कैपेसिटी विस्तार का काम पूरी रफ्तार से चल रहा है। अगले दो साल में 7 मिलियन टन का लक्ष्य है। साथ ही, डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एक नया स्पेशलाइज्ड ट्यूब मिल भी शुरू किया गया है, जिसके प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग अभी चल रही है।
ध्यान देने वाली बातें (Risks)
निवेशकों को मिडिल ईस्ट ऑपरेशंस पर नजर रखनी होगी, जो फिलहाल ऐतिहासिक स्तर के केवल 40% पर हैं। इसके अलावा, कंटेनर फ्रेट में अस्थिरता एक्सपोर्ट मार्जिन पर असर डाल सकती है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि H2 में कैश फ्लो में बेहतर सुधार होगा क्योंकि H1 का ₹400 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर अब कम होने की उम्मीद है।
