AGI Infra Ltd ने **₹275 करोड़** तक की पूंजी जुटाने के लिए पोस्टल बैलट प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी Qualified Institutions Placement (QIP) के जरिए यह फंड इकट्ठा करना चाहती है, ताकि भविष्य के प्रोजेक्ट्स और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
विस्तार के लिए पूंजी का इंतजाम
AGI Infra ने अपनी भविष्य की विकास योजनाओं को गति देने के लिए QIP के जरिए ₹275 करोड़ जुटाने का प्रस्ताव रखा है। कंपनी का उद्देश्य इस राशि का उपयोग नए प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करने, जमीन अधिग्रहण और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में करना है। अभी यह सिर्फ एक सक्षम प्रस्ताव (enabling resolution) है, जिसका मतलब है कि फिलहाल कोई इक्विटी डाइल्यूशन नहीं हुआ है।
वोटिंग और जरूरी तारीखें
इस प्रस्ताव पर मुहर लगाने के लिए शेयरधारकों को वोट करना होगा। 25 सितंबर 2026 तक कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज शेयरधारक इस प्रक्रिया के लिए पात्र हैं। ई-वोटिंग की विंडो 6 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 4 नवंबर 2026 तक खुली रहेगी, जिसके नतीजे 6 नवंबर 2026 या उससे पहले घोषित कर दिए जाएंगे।
SEBI के नियमों का पालन
कंपनी ने साफ किया है कि QIBs के लिए होने वाली इस इश्यू प्रक्रिया में बोर्ड को फ्लोर प्राइस पर अधिकतम 5% तक की छूट देने का अधिकार होगा, जो पूरी तरह से SEBI (ICDR) नियमों के दायरे में होगा। खास बात यह है कि इस इश्यू में प्रमोटर्स या मैनेजमेंट की हिस्सेदारी नहीं होगी, जिससे मैनेजमेंट कंट्रोल में कोई बदलाव नहीं आएगा।
निवेशकों के लिए जोखिम
हालांकि यह अभी सिर्फ एक अनुमति प्रक्रिया है, लेकिन भविष्य में जब भी कंपनी फंड जुटाएगी, तो मौजूदा शेयरधारकों की इक्विटी का डाइल्यूशन होना निश्चित है। निवेशकों को कंपनी के उन बोर्ड फैसलों पर नजर रखनी चाहिए जहां फाइनल इश्यू प्राइस और समय की जानकारी दी जाएगी, क्योंकि इनका असर सीधे तौर पर प्रति शेयर आय (EPS) और वैल्यूएशन पर पड़ेगा।
