A2Z Infra Engineering ने अपनी 25वीं AGM की तारीख का ऐलान कर दिया है, लेकिन कंपनी के सामने खड़ी चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ऑडिटर्स ने कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) स्टेटस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
A2Z Infra Engineering ने अपनी 25वीं AGM 26 सितंबर, 2026 को तय की है। इस बैठक में मैनेजिंग डायरेक्टर अमित मित्तल की दोबारा नियुक्ति और ऑडिटर्स की नियुक्ति पर चर्चा होनी है। हालांकि, कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर ऑडिटर्स की 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' (Disclaimer of Opinion) रिपोर्ट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
वित्तीय स्थिति और ऑडिटर्स की चेतावनी
भले ही कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹336.27 करोड़ से बढ़कर ₹386.44 करोड़ हो गया हो, लेकिन स्टैंडअलोन स्तर पर नुकसान ₹1.05 करोड़ से बढ़कर ₹2.79 करोड़ तक पहुंच गया है। ऑडिटर्स ने करीब ₹1,076.60 करोड़ के स्टैंडअलोन घाटे का हवाला देते हुए कंपनी के आगे काम करने की क्षमता पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
कानूनी पचड़े और लिक्विडिटी का संकट
कंपनी के सामने केवल वित्तीय बोझ ही नहीं, बल्कि कानूनी चुनौतियां भी खड़ी हैं।
- डेट सेटलमेंट: कंपनी कर्ज कम करने के लिए लेंडर्स के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) कर रही है। 24 फरवरी, 2026 को Indian Bank के साथ ₹50 करोड़ का सेटलमेंट किया गया है।
- मैनेजमेंट पर आंच: कंपनी के एमडी अमित मित्तल हाल ही में न्यायिक हिरासत में थे। हालांकि हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद वे जमानत पर बाहर हैं, लेकिन कंपनी के संचालन पर इसका असर पड़ा है।
आगे क्या करें निवेशक?
निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण 'डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल' (DRT) के मामलों पर नजर रखना है। कंपनी की लिक्विडिटी पूरी तरह से पुराने ट्रेड रिसीवेबल्स की वसूली पर टिकी है। AGM में मैनेजमेंट से इन पेंडिंग कानूनी मामलों और कर्ज कम करने के रोडमैप पर स्पष्टीकरण मांगना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है।
