iSERA Lifesciences के प्रमोटर्स ने भले ही **8.61 मिलियन** नए शेयर हासिल किए हों, लेकिन कंपनी के इक्विटी बेस में भारी इजाफे के चलते उनकी कुल हिस्सेदारी **58.63%** से घटकर **55.07%** पर आ गई है।
इक्विटी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
1 अक्टूबर, 2026 को कंपनी ने एक प्रेफरेंशियल शेयर स्वैप प्रक्रिया पूरी की, जिससे कंपनी का पूरा कैपिटल स्ट्रक्चर बदल गया है। हालांकि प्रमोटर ग्रुप ने 86,13,000 अतिरिक्त शेयर अपने नाम किए हैं, जिससे उनकी कुल होल्डिंग बढ़कर 1,35,43,001 शेयरों तक पहुंच गई है, लेकिन कंपनी की कुल इक्विटी कैपिटल में 8.41 मिलियन से 24.59 मिलियन शेयरों तक का उछाल आया है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
रिटेल निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि प्रेफरेंशियल इश्यू का सीधा असर अर्निंग्स पर शेयर (EPS) पर पड़ता है। कंपनी ने अपनी ग्रोथ और स्ट्रैटेजिक विस्तार के लिए इक्विटी बेस बढ़ाया है, लेकिन इससे मौजूदा हिस्सेदारी का प्रतिशत पतला (Dilute) हो जाता है।
कैपिटल पर असर
कंपनी की कुल इक्विटी कैपिटल अब बढ़कर ₹24.59 करोड़ हो गई है, जो पहले ₹8.41 करोड़ थी। कंपनी अभी भी प्रमोटर कंट्रोल के तहत है, लेकिन अब बाजार की नजर इस बात पर है कि जुटाए गए इस नए कैपिटल का इस्तेमाल कंपनी भविष्य में ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रिटर्न रेशियो को सुधारने के लिए कैसे करती है। आने वाली तिमाही के नतीजों में इस विस्तार का असर साफ देखा जा सकेगा।
