Vivo Bio Tech के लिए FY26 चुनौतीपूर्ण रहा। कंपनी को **₹1.71 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछले साल यह मुनाफा **₹7.28 करोड़** था। हालांकि कंपनी ने **30** से ज्यादा नए क्लाइंट्स जोड़े हैं, लेकिन भारी निवेश और टैक्स चार्ज ने नतीजों पर दबाव डाला है।
मुनाफे में गिरावट का असली कारण
कंपनी के नतीजों को देखें तो टोटल इनकम ₹53.78 करोड़ तक पहुंच गई है, जो पिछले साल ₹51.48 करोड़ थी। लेकिन मुनाफे की जगह घाटा दिखने की मुख्य वजह ₹5.71 करोड़ का वन-टाइम डेफर्ड टैक्स चार्ज है।
क्यों दबाव में है कंपनी?
Vivo Bio Tech इस समय एग्रेसिव ग्रोथ मोड में है। कंपनी ने डॉग स्टडीज के लिए एक नया NGCMA GLP-सर्टिफाइड लार्ज-एनिमल फैसिलिटी शुरू किया है। इस भारी इन्वेस्टमेंट के चलते कैश फ्लो पर असर पड़ा है, जिससे डेट सर्विस कवरेज रेशियो 0.83x पर आ गया है (पिछली बार यह 1.38x था)।
क्लाइंट्स और ऑपरेशनल अपडेट
कंपनी का बिजनेस विस्तार जारी है। इस साल NATCO, Dabur और Lab4Life जैसी बड़ी कंपनियों के साथ ₹19.83 करोड़ के नए कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए हैं। साथ ही, कंपनी ने सेफ्टी फार्माकोलॉजी जैसी एडवांस सेवाएं भी शुरू की हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks)
फिलहाल लिक्विडिटी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। करंट रेशियो गिरकर 0.94x हो गया है, जिसका मतलब है कि कंपनी की करेंट लायबिलिटीज एसेट्स से ज्यादा हैं। मैनेजमेंट ने स्वीकार किया है कि अस्थायी कैश-फ्लो मिसमैच की वजह से कर्ज चुकाने में देरी हुई है, जिसे आने वाली तिमाहियों में सुधारना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती होगी।
