लगातार 5वीं बार घाटे में VISTA Pharmaceuticals
कंपनी के नतीजों के अनुसार, 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में Vista Pharmaceuticals का नेट लॉस बढ़कर ₹12.06 करोड़ हो गया है। वहीं, कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from operations) में भी भारी गिरावट आई है, जो पिछले साल के ₹10.07 करोड़ की तुलना में घटकर इस साल सिर्फ ₹5.40 करोड़ रह गया है। यह लगातार पांचवां साल है जब कंपनी घाटे में रही है, जो इसके निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
लोन डिफॉल्ट और 'गोइंग कंसर्न' का खतरा
वित्तीय संकट यहीं नहीं रुकता। कंपनी ने बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) को चुकाए जाने वाले टर्म लोन की किश्तों में भी डिफॉल्ट किया है। कंपनी के अपने बोर्ड ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी भविष्य में चलते रहने की क्षमता पर 'मटेरियल अनिश्चितता' (Material Uncertainty) है। इसका मतलब है कि कंपनी का भविष्य वित्तीय रूप से अनिश्चित लग रहा है।
फंड जुटाने की कोशिशें?
इन मुश्किलों के बीच, कंपनी ने प्रमोटरों और कुछ निवेशकों को कन्वर्टिबल वॉरंट्स (Convertible Warrants) जारी किए हैं, जिससे उसे ₹3.08 करोड़ की शुरुआती रकम मिली है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि इससे कंपनी की लिक्विडिटी (Liquidity) यानी नकदी की स्थिति सुधरेगी। हालांकि, मौजूदा कर्ज और स्टैच्यूटरी ड्यूज (Statutory Dues) को चुकाने की क्षमता अभी भी एक बड़ा सवाल है।
बड़े जोखिम:
- 'गोइंग कंसर्न' की अनिश्चितता।
- बैंक लोन डिफॉल्ट जारी रहना।
- टैक्स, पीएफ, टीडीएस और ईएसआई जैसे स्टैच्यूटरी बकाए को क्लियर करने में विफलता।
- नेगेटिव वर्किंग कैपिटल (Negative Working Capital) की स्थिति।
- ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables) पर ₹8.22 करोड़ का भारी इम्पेयरमेंट (Impairment), जो वसूली में बड़ी दिक्कतों की ओर इशारा करता है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को अब इस बात पर बारीकी से नजर रखनी होगी कि कंपनी जारी किए गए कन्वर्टिबल वॉरंट्स को कितनी जल्दी कन्वर्ट करती है और उससे कितना फंड आता है। साथ ही, बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ लोन रिपेमेंट को नियमित करने और सभी बकाया स्टैच्यूटरी देनदारियों को चुकाने की दिशा में कंपनी की प्रगति कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
