Suraksha Diagnostic ने FY26 में शानदार प्रदर्शन किया, डिविडेंड की सिफारिश
Suraksha Diagnostic Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 21 मई, 2026 को हुई बैठक में 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के ऑडिटेड वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी। कंपनी ने ₹61.60 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) और ₹57.06 करोड़ का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स घोषित किया।
डिविडेंड की मंजूरी और AGM
बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर ₹0.50 (फेस वैल्यू का 25%) के डिविडेंड की सिफारिश की है। यह सिफारिश आगामी 21वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगी। AGM का आयोजन 2 सितंबर, 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किया जाएगा।
वित्तीय प्रदर्शन की मुख्य बातें
31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए Suraksha Diagnostic ने निम्नलिखित आंकड़े पेश किए:
- कंसोलिडेटेड रेवेन्यू: ₹82.20 करोड़
- कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स: ₹61.60 करोड़
- स्टैंडअलोन रेवेन्यू: ₹79.86 करोड़
- स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स: ₹57.06 करोड़
31 मार्च, 2026 तक, कंपनी की कंसोलिडेटेड संपत्ति ₹448.12 करोड़ थी, जिसमें कंसोलिडेटेड देनदारियां ₹204.64 करोड़ थीं। स्टैंडअलोन संपत्ति ₹450.14 करोड़ और स्टैंडअलोन देनदारियां ₹200.34 करोड़ थीं।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियुक्तियां
कंपनी ने AGM के नोटिस को भी मंजूरी दी और प्रमुख नियुक्तियां कीं। M/s. Suresh Surana & Associates LLP को FY26-27 के लिए आंतरिक ऑडिटर (Internal Auditor) नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, M/s. S Chhaparia & Associates को समान वित्तीय वर्ष के लिए कॉस्ट ऑडिटर (Cost Auditor) के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है। दोनों नियुक्तियां शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर हैं।
सहायक कंपनी का विवाद और जोखिम मूल्यांकन
Suraksha Diagnostic को मेघालय सरकार के साथ एक विवाद के कारण एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इस विवाद के कारण कंपनी की एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी को परिचालन घाटा हुआ है। इस सब्सिडियरी से संबंधित ₹392.20 लाख के निवेश, ऋण और व्यापार प्राप्तियों की वसूली का मूल्यांकन वर्तमान में चल रहा है। प्रबंधन इस मामले को सुलझाने के लिए आर्बिट्रेशन (Arbitration) की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।
निवेशक क्या देखें
शेयरधारक आगामी AGM में प्रस्तावित डिविडेंड पर मतदान करेंगे। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सहायक कंपनी विवाद से संबंधित आर्बिट्रेशन कार्यवाही की प्रगति और परिणाम पर भी बारीकी से नजर रखें, क्योंकि यह कंपनी के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है।
