Smruthi Organics ने अपने शेयरहोल्डर्स के लिए ₹1.50 प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान किया है। साथ ही, कंपनी ने स्मृति ईगा को होल-टाइम डायरेक्टर बनाने का प्रस्ताव दिया है। इस फाइनेंशियल ईयर 26 में कंपनी ने ₹3.43 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है।
Smruthi Organics की 37वीं AGM में बड़े फैसले
Smruthi Organics लिमिटेड ने अपने शेयरधारकों को ₹1.50 प्रति शेयर (15%) का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनी ने इसके लिए रिकॉर्ड डेट 31 जुलाई 2026 तय की है। साथ ही, 10 अगस्त 2026 को कंपनी की 37वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) होगी।
कौन हैं स्मृति ईगा?
कंपनी ने स्मृति ईगा को 1 जून 2026 से तीन साल के लिए होल-टाइम डायरेक्टर बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। उनके सालाना वेतन की बात करें तो यह ₹7 लाख प्रति माह (यानी ₹84 लाख सालाना) प्लस अलाउंस होगा, जो शेयरधारकों और सरकारी मंजूरी पर निर्भर करेगा। कंपनी ने Shriniwas Diddi & Associates को FY 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर के तौर पर नियुक्त करने की सिफारिश की है।
क्यों अहम है ये खबर?
शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का ऐलान सीधा फायदा है। वहीं, स्मृति ईगा की नियुक्ति, खासकर अमेरिका जैसे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर फोकस के साथ, कंपनी के ग्लोबल एक्सपेंशन की रणनीति को दर्शाती है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में ₹102.09 करोड़ का नेट सेल्स और अन्य इनकम दर्ज किया, जबकि कुल खर्चे ₹96.96 करोड़ रहे। इसके चलते ₹3.43 करोड़ का नेट प्रॉफिट (PAT) हुआ। हालांकि, नए लेबर कोड्स के कारण ₹0.46 करोड़ का एक एक्सेप्शनल स्टैच्यूटरी चार्ज भी इस मुनाफे पर असर डालेगा।
कंपनी की रणनीति
Smruthi Organics कच्चे माल पर निर्भरता कम करने और मार्जिन सुधारने के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर जोर दे रही है। हैदराबाद में DSIR अप्रूव्ड R&D लैब में निवेश जारी है, जिसका मकसद कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाना है। कंपनी खासकर अमेरिका में अपनी इंटरनेशनल सेल्स बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
आगे क्या?
स्मृति ईगा की नियुक्ति से कंपनी को अमेरिकी बाजार में अपनी रणनीति को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। AGM में डिविडेंड और नई नियुक्ति जैसे फैसलों पर मुहर लगेगी, जो कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस और भविष्य की दिशा को प्रभावित करेंगे।
जोखिमों पर नजर
कम बिक्री, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और बढ़ते ऑपरेटिंग खर्चे कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। नए लेबर कोड्स का असर पहले ही एक एक्सेप्शनल चार्ज के रूप में दिख चुका है। भविष्य का मुनाफा घरेलू और विदेशी बाजारों के हालात और ग्राहकों की मांग पर निर्भर करेगा।
