Parmax Pharma के लिए FY26 बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी का रेवेन्यू **57%** गिरकर **₹12.11 करोड़** पर आ गया है, जबकि नेट लॉस बढ़कर **₹4.16 करोड़** हो गया है। सबसे बड़ी चिंता ऑडिटर द्वारा नियमों के उल्लंघन और इंटरनल ऑडिट फेल होने पर उठाए गए सवाल हैं।
बिगड़ती फाइनेंशियल स्थिति
कंपनी के नतीजों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2026 में स्थिति काफी कमजोर नजर आती है। पिछले साल के ₹28.20 करोड़ के मुकाबले रेवेन्यू घटकर सिर्फ ₹12.11 करोड़ रह गया है। वहीं, कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के ₹2.09 करोड़ से लगभग दोगुना होकर ₹4.16 करोड़ पर पहुंच गया है।
ऑडिटर के कड़े सवाल
कंपनी के लिए केवल फाइनेंशियल घाटा ही मुसीबत नहीं है, बल्कि स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स ने Companies Act, 2013 के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऑडिटर की रिपोर्ट में तीन बड़े बिंदुओं पर चिंता जताई गई है:
- डिपॉजिट्स: नियमों के विरुद्ध जाकर डिपॉजिट स्वीकार करना।
- इन्वेस्टमेंट: म्यूचुअल फंड निवेश को कंपनी के बजाय मैनेजिंग डायरेक्टर के नाम पर रखना।
- इंटरनल ऑडिट: अनिवार्य इंटरनल ऑडिट को पूरा करने में विफलता।
मैनेजमेंट ने इन सब को केवल प्रोसीजरल चूक बताया है और सुधारात्मक कदम उठाने का दावा किया है।
आगे की राह और कॉरपोरेट बदलाव
कंपनी ने भविष्य की फंडिंग की तैयारी के लिए अपनी ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल को ₹6 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया है। इसके अलावा, बोर्ड ने चार नए डायरेक्टर्स - धिरेन चंदुलाल शाह, सुनील चिनुभाई शाह, अंजना परेश शाह और आशीष आत्माराम शाह - की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा है, जिस पर आगामी AGM में मंजूरी ली जाएगी।
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनी ऑडिटर द्वारा उठाए गए इन गंभीर सवालों को कितनी जल्दी सुलझाती है और क्या वे डिपॉजिट्स की वापसी जैसे मामलों पर ठोस कदम उठा पाते हैं या नहीं।
