Oxygenta Pharmaceutical ने FY26 के लिए **₹17.57 करोड़** का घाटा दर्ज किया है। कंपनी की नेट वर्थ **₹42.69 करोड़** नेगेटिव हो गई है। ऑडिटर ने कंपनी की भविष्य की स्थिरता पर सवाल उठाए हैं।
Oxygenta Pharmaceutical का हाल बेहाल
Oxygenta Pharmaceutical ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ₹17.57 करोड़ का बड़ा नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। यह पिछले साल के ₹10.30 करोड़ के घाटे से कहीं ज्यादा है। कंपनी के ऑपरेशंस से रेवेन्यू में मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो ₹109.30 करोड़ से बढ़कर ₹112.98 करोड़ हो गया। लेकिन, कंपनी का कुल खर्च 8.40% बढ़कर ₹135.45 करोड़ हो गया, जो रेवेन्यू ग्रोथ से ज्यादा है। चिंता की बात यह है कि कंपनी की नेट वर्थ अब ₹(42.69) करोड़ पर पहुंच गई है, यानी कंपनी पर देनदारियां संपत्ति से काफी ज्यादा हो गई हैं।
क्यों है ये चिंता की बात?
बढ़ता घाटा और नेगेटिव नेट वर्थ Oxygenta Pharmaceutical की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इंडिपेंडेंट ऑडिटर ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (यानी लगातार चलते रहने की क्षमता) पर 'मटेरियल अनिश्चितता' (Material Uncertainty) की चेतावनी जारी की है। इसका सीधा मतलब है कि शेयरधारकों के लिए कंपनी के लंबे समय तक चलने की व्यवहार्यता पर एक बड़ा जोखिम मंडरा रहा है।
बैकग्राउंड क्या है?
इस मुश्किल दौर में, 20 जून 2025 को Virupaksha Organics Limited ने Oxygenta Pharmaceutical में 56.5% हिस्सेदारी खरीदकर कंपनी का नया प्रमोटर (Promoter) बन गया है। अब Oxygenta, Virupaksha Organics की सब्सिडियरी (Subsidiary) है। यह अधिग्रहण ऐसे समय में हुआ है जब Oxygenta भारी फाइनेंशियल दबाव झेल रही है।
अब क्या बदलेगा?
नए मैनेजमेंट Virupaksha Organics के नेतृत्व में, कंपनी एक बिजनेस रीस्ट्रक्चरिंग प्लान (Business Restructuring Plan) लागू कर रही है। FY 2026-27 के लिए प्रपोज्ड रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस (Related Party Transactions) में होल्डिंग कंपनी के साथ ₹130 करोड़ की बिक्री और ₹120 करोड़ की खरीद शामिल है। साथ ही, ₹200 करोड़ के लोन और गारंटी का भी प्रस्ताव है। मैनेजमेंट का लक्ष्य FY 2026-27 में पॉजिटिव EBITDA पर लौटना है।
किन जोखिमों पर नजर रखें?
ऑडिटर ने लगातार घाटे और नेगेटिव नेट वर्थ के कारण कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस पर अनिश्चितता जताई है। इसके अलावा, ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (Drugs Control Administration) द्वारा कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस सात दिनों के लिए सस्पेंड किया गया था। एक और बड़ा जोखिम यह है कि कंपनी का लगभग 63.87% रेवेन्यू सिर्फ होल्डिंग कंपनी, Virupaksha Organics से आता है, जो एक कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) पैदा करता है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को बिजनेस रीस्ट्रक्चरिंग प्लान की प्रगति, प्रपोज्ड रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस के नतीजे और ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस पर भविष्य की टिप्पणियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। साथ ही, रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) और ऑपरेशनल स्टेबिलिटी (Operational Stability) भी महत्वपूर्ण फैक्टर होंगे।
