Novartis India ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने Pfizer से Minipress XL को **₹1,250 करोड़** में खरीदा है और अब अपना खुद का सेल्स मॉडल तैयार कर रही है। अगले 4-5 साल में कंपनी अपने रेवेन्यू को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
बड़े बदलाव की तैयारी
Novartis India अब थर्ड-पार्टी सेल्स और मार्केटिंग पर निर्भरता खत्म कर रही है। कंपनी अब खुद अपनी सेल्स टीम खड़ी कर रही है, जो देश भर के 1,50,000 हेल्थकेयर प्रैक्टिसनर्स तक पहुंचेगी। साथ ही, कंपनी अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को 4 से बढ़ाकर 25 एजेंटों तक ले जा रही है।
क्यों है यह अधिग्रहण खास?
Cardiology, CNS और Ophthalmology जैसे सेक्टर्स में पकड़ मजबूत करने के लिए ₹1,250 करोड़ में Minipress XL ब्रांड का अधिग्रहण एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इससे कंपनी को अल्फा-ब्लॉकर मार्केट में तुरंत एक लीडरशिप पोजीशन मिल जाएगी।
मार्जिन पर दबाव, लंबी रेस की तैयारी
निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि शॉर्ट-टर्म में कंपनी के मार्जिन पर असर पड़ेगा। मैनेजमेंट ने बताया है कि सेल्स टीम और मार्केटिंग पर प्रति तिमाही ₹40-50 करोड़ का अतिरिक्त खर्च होगा। हालांकि, कंपनी का लक्ष्य 2-3 साल के भीतर वापस 20% से ज्यादा के मार्जिन पर लौटना है।
बोर्ड और गवर्नेंस
कंपनी में 70.68% हिस्सेदारी रखने वाली ChrysCapital ने एक नया बोर्ड तैयार किया है, जिसमें 3M India, Strides Pharma और Zydus के दिग्गज शामिल हैं। कंपनी अब अपनी नई पहचान बनाने के लिए नाम बदलने की प्रक्रिया भी शुरू करेगी।
निवेशकों के लिए रिस्क
सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपनी नई सेल्स टीम को कितनी तेजी से इंटीग्रेट कर पाती है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में मार्जिन में आने वाली गिरावट पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कंपनी अभी भारी निवेश के दौर से गुजर रही है।
