Nephrocare Health Services Ltd की सब्सिडियरी को कानूनी जीत मिली है। ताशकंद की अदालत ने ऑडिट में अनियमितताओं का हवाला देते हुए कंपनी पर लगे **₹14.79 करोड़** के टैक्स डिमांड को अमान्य घोषित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
Nephrocare Health Services Ltd की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी, Nephrocare Health Services Central Asia LLC (NCA) ने ताशकंद इंटर-डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्ट में टैक्स असेसमेंट को चुनौती दी थी। कोर्ट ने 27 अक्टूबर, 2026 को फैसला सुनाते हुए टैक्स विभाग के 24 अगस्त, 2026 के आदेश (Decision No. 721.1) को रद्द कर दिया है।
राहत की बड़ी वजह
अदालत ने पाया कि ऑडिट प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। टैक्स अधिकारियों ने न तो कोई पूर्व नोटिस दिया और न ही सब्सिडियरी को रिव्यू प्रक्रिया में शामिल किया। इसके अलावा, ऑडिट की अवधि को भी नियमों के विरुद्ध बढ़ाया गया था। इस फैसले से कंपनी को ₹11.50 करोड़ के टैक्स और ₹3.29 करोड़ की पेनल्टी, यानी कुल ₹14.79 करोड़ के भुगतान से फौरी राहत मिली है।
आगे क्या होगा?
कोर्ट ने टैक्स विभाग को ऑडिट सामग्रियों पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि नई प्रक्रिया में सब्सिडियरी की स्थिति पहले से खराब नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों के पास 30 दिन का समय है, लेकिन वे ताशकंद सिटी एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील भी कर सकते हैं।
निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी के आगामी BSE फाइलिंग्स पर नजर रखें, क्योंकि मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है और टैक्स विभाग की अगली कार्रवाई या अपील पर स्थिति निर्भर करेगी।
