Nephrocare Health Services की उज्बेकिस्तान स्थित सब्सिडियरी, NCA, पर वहां के टैक्स विभाग ने **₹14.79 करोड़** का भारी जुर्माना लगाया है। कंपनी ने इसे डेटा में तालमेल की कमी बताया है और कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
टैक्स डिमांड का पूरा गणित
ताशकंद सिटी टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से जारी इस ऑर्डर में ₹11.50 करोड़ का मुख्य टैक्स असेसमेंट और ₹3.29 करोड़ का जुर्माना शामिल है। यह ऑडिट 2023 से 2025 के पीरियड के लिए किया गया था। इसमें लेट-पेमेंट इंटरेस्ट को अभी जोड़ा नहीं गया है, जो इस राशि को और बढ़ा सकता है।
क्यों मचा है विवाद?
कंपनी का दावा है कि उसकी डायलिसिस सर्विसेज टैक्स-फ्री कैटेगरी में आती हैं, क्योंकि यह कंपनी के कुल रेवेन्यू का 90% से ज्यादा हिस्सा कवर करती है। विवाद की मुख्य वजह टैक्स विभाग के रेवेन्यू आंकड़ों और हेल्थ मिनिस्ट्री के पेमेंट रिकॉर्ड्स के बीच का बड़ा अंतर (Mismatch) बताया जा रहा है।
कंपनी का अगला कदम
मैनेजमेंट ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इस नोटिस का कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ पर कोई 'मटेरियल इम्पैक्ट' नहीं पड़ेगा। फिलहाल, NCA इस असेसमेंट को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्पों पर काम कर रही है। निवेशकों को सलाह है कि वे BSE पर आने वाली कंपनी की अगली फाइलिंग पर नजर रखें, क्योंकि टैक्स लायबिलिटी का असर ऑर्डर के 1 महीने बाद से शुरू हो सकता है।
