Mercury Laboratories की 45वीं AGM में शेयरधारकों ने मैनेजमेंट के साथ असहमति जताते हुए 5 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है। हालांकि डिविडेंड को मंजूरी मिल गई है, लेकिन डायरेक्टर की नियुक्ति और सैलरी पैकेज पर लगी रोक कंपनी के गवर्नेंस पर बड़े सवाल खड़े करती है।
45वीं AGM में क्या हुआ?
हाल ही में संपन्न हुई Mercury Laboratories की 45वीं AGM में शेयरधारकों ने अपना कड़ा रुख अपनाया है। जहां कंपनी ने ₹3.50 प्रति शेयर का डिविडेंड और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पास कराने में सफलता हासिल की, वहीं 9 में से 5 अहम एजेंडा आइटम्स पर निवेशकों ने अपना समर्थन नहीं दिया।
क्यों है यह बड़ी बात?
इस घटना में 54.92% वोट मैनेजमेंट के खिलाफ पड़े हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि डायरेक्टर मिस्टर दिलीप आर. शाह (Mr. Dilip R Shah) की दोबारा नियुक्ति और एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी (Remuneration) के प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया है। साथ ही, संबंधित इकाई (Related Entity) को दी जाने वाली कंसल्टेंसी फीस पर भी शेयरधारकों ने कैंची चला दी है।
आगे क्या होगा?
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती है। कंपनी को अब यह तय करना होगा कि क्या वे इन प्रस्तावों को कुछ बदलावों के साथ दोबारा पेश करेंगे या फिर लीडरशिप और गवर्नेंस स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की तलाश करेंगे। यह स्थिति कॉरपोरेट गवर्नेंस में एक तरह के डेडलॉक (Deadlock) की ओर इशारा कर रही है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks to watch)
इन्वेस्टर्स को अब कंपनी की ओर से आने वाले रेगुलेटरी फाइलिंग्स पर बारीक नजर रखनी होगी। एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी को मंजूरी न मिलने और बोर्ड मेंबर की दोबारा नियुक्ति में रुकावट आने से कंपनी के ऑपरेशनल मैनेजमेंट में अस्थिरता आ सकती है। कंसल्टेंसी फीस पर सवाल खड़े होना भविष्य में 'रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन' को लेकर सख्त स्क्रूटनी का संकेत भी है।
