Laxmi Dental Ltd अपनी 22वीं AGM में IPO से मिले अनइस्तेमाल फंड को री-एलोकेट करने की तैयारी में है। कंपनी इस ₹48.1 करोड़ की राशि का इस्तेमाल नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और मशीनरी खरीदने के लिए करना चाहती है, जिसके लिए निवेशकों की 90% मंजूरी अनिवार्य है।
फंड का नया डेस्टिनेशन
कंपनी अपनी 22वीं AGM (25 सितंबर, 2026) में एक स्पेशल रेजोल्यूशन लेकर आ रही है। इस प्रस्ताव के तहत, IPO से जुटाए गए ₹48.103 करोड़ के फंड को अब नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाने और मशीनों को अपग्रेड करने में खर्च किया जाएगा। इसमें से ₹26.896 करोड़ जमीन और निर्माण कार्य पर, जबकि ₹21.207 करोड़ CAD/CAM जैसी एडवांस मशीनों और कंप्यूटर सिस्टम पर खर्च होंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
डिजिटल डेंटिस्ट्री और क्लियर अलाइनर्स (Clear Aligners) की बढ़ती डिमांड को देखते हुए, कंपनी अपनी प्रोडक्शन क्षमता को 3 गुना बढ़ाना चाहती है। लीज पर चलने के बजाय अब कंपनी अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बनाना चाहती है, जिससे न केवल रेंटल कॉस्ट कम होगी, बल्कि लॉन्ग टर्म ऑपरेशनल एफिशिएंसी भी बेहतर होगी।
सबसे बड़ी चुनौती: '90% का आंकड़ा'
यह कोई सामान्य प्रस्ताव नहीं है। कंपनी को इस बदलाव के लिए कम से कम 90% शेयरधारकों की सहमति की जरूरत है। अगर वोटिंग में यह जादुई आंकड़ा नहीं मिलता है, तो कंपनी का यह पूरा विस्तार प्लान फिलहाल के लिए ठंडे बस्ते में जा सकता है।
बोर्ड में बदलाव
AGM में राजेश व्रजलाल खाखर की होल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर री-अपॉइंटमेंट पर भी चर्चा होगी। उनका नया कार्यकाल अगस्त 2029 तक का होगा।
