Krsnaa Diagnostics ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करते हुए **₹120 करोड़** के डायग्नोस्टिक उपकरणों को बेचने का फैसला किया है। कंपनी अब 'एसेट-लाइट' मॉडल की ओर बढ़ रही है ताकि कैपिटल को बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।
एसेट-लाइट मॉडल की ओर कदम
Krsnaa Diagnostics ने अपने पोर्टफोलियो को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के बोर्ड ने ₹120 करोड़ तक के डायग्नोस्टिक उपकरणों (Diagnostic equipment) की बिक्री को मंजूरी दे दी है। यह कदम कंपनी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह 'एसेट-लाइट' और ज्यादा कैपिटल-एफिशिएंट मॉडल पर शिफ्ट होना चाहती है।
इस फैसले का क्या मतलब है?
मैनेजमेंट का मुख्य लक्ष्य ROCE (Return on Capital Employed) को बेहतर बनाना है। कंपनी इन फ्रीहोल्ड एसेट्स को बेचकर जो पूंजी जुटाएगी, उसे अपने कोर डायग्नोस्टिक ऑपरेशंस और ग्रोथ वाले सेगमेंट्स में दोबारा निवेश करेगी। कंपनी ने साफ किया है कि ये एसेट्स किसी भी लेंडर के पास गिरवी नहीं थे, इसलिए मौजूदा क्रेडिट व्यवस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
आगे क्या होगा?
ऑपरेशंस कमेटी को सौदे की शर्तों को फाइनल करने के लिए अधिकृत किया गया है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी इस ₹120 करोड़ की राशि का इस्तेमाल कैसे करती है—क्या यह कर्ज चुकाने में जाएगा या फिर हाई-मार्जिन विस्तार में निवेश किया जाएगा।
जोखिम पर नजर
हालांकि कंपनी का मानना है कि कामकाज पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, लेकिन असली चुनौती इस स्ट्रैटेजी को सही तरीके से लागू करने की है। सर्विस की क्वालिटी बनी रहती है या नहीं और नई पूंजी का कितना कुशल उपयोग होता है, यह लंबी अवधि के लिए निवेश का आधार तय करेगा।
