Krishna Institute of Medical Sciences (KIMS) के प्रमोटर्स ने **2.8 करोड़** शेयर, यानी कंपनी की **6.66%** हिस्सेदारी को डिबेंचर होल्डर्स के पास गिरवी रखा है। इस कदम से प्रमोटर-लेवल पर कर्ज का दबाव बढ़ा है, जिस पर निवेशकों को नजर रखने की जरूरत है।
प्रमोटर्स ने बढ़ाया कर्ज का दायरा
KIMS के प्रमोटर्स भास्कर राव बोलिनेनी और बोलिनेनी सीनाैया नायडू ने कंपनी के कुल 2,80,08,979 इक्विटी शेयर गिरवी रखे हैं। यह कंपनी की कुल पेड-अप शेयर कैपिटल का 6.66% हिस्सा है। Catalyst Trusteeship Limited की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, ये शेयर डिबेंचर होल्डर्स की सुरक्षा के तौर पर रखे गए हैं।
निवेशकों के लिए यह क्यों है जरूरी?
शेयर गिरवी रखना (Pledging) कंपनियों में फाइनेंस जुटाने का एक आम तरीका है, लेकिन छोटे निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। अगर प्रमोटर्स कर्ज चुकाने में नाकाम रहते हैं, तो डिबेंचर ट्रस्टी के पास इन गिरवी रखे शेयरों को बेचने का अधिकार होता है। ऐसी स्थिति में बाजार में अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है, जिससे स्टॉक की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आगे क्या होगा?
कंपनी के कामकाज पर इसका फिलहाल कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि कंपनी का ढांचा वही है। लेकिन, अब बाजार को प्रमोटर्स के कर्ज की स्थिति के बारे में साफ जानकारी मिल गई है। भविष्य में यदि प्रमोटर्स इन शेयरों को छुड़ाते हैं या और ज्यादा शेयर गिरवी रखते हैं, तो रेगुलेटरी फाइलिंग के जरिए इसकी जानकारी सामने आएगी, जिस पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी चाहिए।
जोखिम पर रखें नजर
सबसे बड़ा रिस्क यह है कि अगर कर्ज की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो शेयरों की वैल्यू प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को आने वाले समय में मैनेजमेंट की कमेंट्री और कर्ज चुकाने के शेड्यूल पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ को सही तरह से समझ सकें।
