Kovai Medical Center & Hospital के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। चेन्नई कस्टम अथॉरिटी ने 90 के दशक के एक पुराने आयात विवाद में अस्पताल को **₹2.11 करोड़** की देनदारी का भुगतान करने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
चेन्नई के जॉइंट कमिश्नर ऑफ कस्टम्स ने Kovai Medical Center & Hospital को ₹2.11 करोड़ का भुगतान करने का फरमान सुनाया है। यह विवाद साल 1990 से 1993 के बीच आयात की गई मेडिकल मशीनों से जुड़ा है। अस्पताल ने उस दौरान ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट का लाभ लिया था, लेकिन अब विभाग ने इसे वापस ले लिया है।
क्यों लिया गया एक्शन?
कस्टम विभाग का कहना है कि अस्पताल ने इंपोर्ट के बाद तय शर्तों को पूरा नहीं किया। नियमों के अनुसार, अस्पताल को अपने कुल ओपीडी मरीजों में से कम से कम 40% का इलाज मुफ्त करना था और 10% बेड गरीब मरीजों के लिए आरक्षित रखने थे। जांच में पाया गया कि अस्पताल ने न केवल इन शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि रिकॉर्ड्स का भी ठीक से रखरखाव नहीं किया था।
क्या शामिल है इस जुर्माने में?
अथॉरिटी के ऑर्डर के मुताबिक, कुल ₹2.11 करोड़ की देनदारी में ₹1.89 करोड़ की कस्टम ड्यूटी, ₹0.03 करोड़ का रिडेम्पशन फाइन और ₹0.19 करोड़ की पेनल्टी शामिल है। यह पूरा विवाद साल 2000 में जारी हुए एक 'शो कॉज नोटिस' से शुरू हुआ था, जो 26 साल तक कानूनी दांव-पेचों में फंसा रहा।
निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि कंपनी के मौजूदा कामकाज के हिसाब से यह रकम बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह निवेशकों के लिए एक चेतावनी है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या हॉस्पिटल मैनेजमेंट इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करता है या नहीं।
