Krishna Institute of Medical Sciences (KIMS) ने अपने चेन्नई हॉस्पिटल प्रोजेक्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने कहा है कि जमीन के विवाद के बावजूद फिलहाल काम जारी रहेगा, क्योंकि कोर्ट से कोई स्टे ऑर्डर नहीं मिला है।
प्रोजेक्ट का क्या है स्टेटस?
KIMS फिलहाल अपने चेन्नई स्थित 1.168 एकड़ की जमीन पर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनाने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि उनके खिलाफ कोई स्टे (Stay) ऑर्डर नहीं है और वे अपने लीज एग्रीमेंट के तहत अधिकारों का इस्तेमाल जारी रखेंगे।
क्यों सुर्खियों में है यह मामला?
यह विवाद जमीन के मालिकाना हक और आंध्र महिला सभा ट्रस्ट (Andhra Mahila Sabha Trust) के प्रशासन को लेकर है। मामला सिविल प्रोसीजर कोड की धारा 92 के तहत एक प्रतिनिधि मुकदमे (representative suit) के तौर पर चल रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने KIMS की एक स्पेशल लीव पिटीशन को खारिज कर दिया है, जिसका मतलब है कि निचली अदालत में इस मामले की सुनवाई अब योग्यता (merits) के आधार पर आगे बढ़ेगी।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
मैनेजमेंट ने भरोसा दिलाया है कि दिसंबर 2025 में साइन किया गया 'लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट' अभी भी कानूनी रूप से मजबूत है और प्रोजेक्ट की कमर्शियल वैल्यू पर कोई असर नहीं पड़ा है।
टाइमलाइन पर एक नजर
- जुलाई 2026: सिंगल जज ने मुकदमा दायर करने की अनुमति दी।
- सितंबर 2026: डिवीजन बेंच ने ट्रस्ट की अपील खारिज की और अंतरिम स्टे हटा दिया।
- अक्टूबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने KIMS की याचिका खारिज कर दी, जिससे मुकदमा ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगा।
आने वाले समय में निवेशकों को ट्रायल कोर्ट की सुनवाई और कानूनी खर्चों से जुड़ी जानकारियों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कोई भी नया आदेश प्रोजेक्ट की समय-सीमा को प्रभावित कर सकता है।
