KIMS Hospitals: रेवेन्यू में उछाल, मुनाफे में गिरावट
Krishna Institute of Medical Sciences Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त चौथी तिमाही और पूरे वित्तीय वर्ष के नतीजे जारी किए हैं। Q4 FY26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू 35.3% बढ़कर ₹1,084 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही से 8.1% ज्यादा है। वहीं, पूरे वित्तीय वर्ष FY26 में कुल रेवेन्यू 28.2% की बढ़ोतरी के साथ ₹3,931 करोड़ तक पहुंच गया।
ऊंचे रेवेन्यू के बावजूद, मुनाफे के आंकड़े चिंताजनक रहे। Q4 FY26 में EBITDA में साल-दर-साल 6.8% की मामूली बढ़ोतरी होकर ₹216 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट (PAT) 69% गिरकर सिर्फ ₹33 करोड़ रह गया। पूरे वित्तीय वर्ष FY26 में, EBITDA में 1.6% की मामूली बढ़ोतरी के साथ ₹828 करोड़ दर्ज किया गया, और PAT 41.7% घटकर ₹242 करोड़ पर आ गया। कंसोलिडेटेड EPS भी 37.2% गिरकर ₹6.03 पर आ गया।
नए हॉस्पिटल्स के खर्चे बने बड़ी वजह
रेवेन्यू में यह शानदार बढ़ोतरी KIMS Hospitals के विस्तार (expansion) और नए हॉस्पिटल्स में मरीजों की बढ़ी हुई संख्या को दर्शाती है। हालांकि, PAT और EBITDA मार्जिन में आई भारी गिरावट यह बताती है कि नए हॉस्पिटल यूनिट्स को खोलने और उन्हें चालू करने में लगे भारी खर्चे मुनाफे पर असर डाल रहे हैं। Q4 FY26 में नए यूनिट्स से ₹224 करोड़ का रेवेन्यू आया, लेकिन ₹32 करोड़ का EBITDA नुकसान भी हुआ। पूरे साल में, नए यूनिट्स के कारण ₹128 करोड़ का EBITDA नुकसान हुआ, जिसे कंपनी FY27 में आधे से ज्यादा कम करने की उम्मीद कर रही है।
कर्ज घटाने और कंसोलिडेशन पर फोकस
KIMS Hospitals ₹1,500 करोड़ एक Qualified Institutions Placement (QIP) के जरिए जुटाने की योजना बना रही है। इस फंडरेज़िंग का मुख्य उद्देश्य ₹3,000 करोड़ से अधिक के कर्ज को चुकाना है। कंपनी छोटी अधिग्रहण (acquisition) के अवसरों की तलाश करने और अपने मौजूदा हॉस्पिटल्स को मजबूत (consolidating) करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगी ताकि मार्जिन में सुधार लाया जा सके।
मुख्य जोखिम और आगे की राह
KIMS Hospitals के लिए मुख्य जोखिमों में नए हॉस्पिटल्स के कारण EBITDA पर लगातार पड़ने वाला दबाव, नए यूनिट्स के चालू होने में देरी की संभावना, और खासकर हैदराबाद जैसे बाजारों में कड़ी प्रतिस्पर्धा शामिल है। QIP का उद्देश्य कर्ज कम करना है, लेकिन कंपनी पर कर्ज का स्तर अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। निवेशक QIP की प्रगति, कर्ज कम करने के प्रयासों और नए हॉस्पिटलों की लाभप्रदता पर बारीकी से नजर रखेंगे। कंपनी का लक्ष्य नेट डेट टू EBITDA रेशियो को वर्तमान 1:3 से सुधारकर 1:2 करना है।
