Krishna Institute of Medical Sciences (KIMS) ने Q1 FY27 के लिए अपने नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में शानदार **35.3%** का उछाल देखने को मिला और यह **₹1,179.5 करोड़** पर पहुंच गया। हालांकि, एक्सपेंशन (expansion) पर हुए खर्च के कारण कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) **56%** घटकर **₹37.4 करोड़** रह गया।
KIMS Hospitals का शानदार रेवेन्यू, पर मुनाफे पर दबाव
Krishna Institute of Medical Sciences Ltd (KIMS) ने हाल ही में चालू वित्तीय वर्ष 2027 (Q1 FY27) की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 35.3% का जोरदार इजाफा हुआ है और यह ₹1,179.5 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, EBITDA में 20.1% की बढ़ोतरी के साथ ₹239.8 करोड़ दर्ज किया गया।
मुनाफे में क्यों आई गिरावट?
रेवेन्यू में जबरदस्त ग्रोथ के बावजूद, कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) 56.0% गिर गया। Q1 FY26 में ₹85.0 करोड़ का मुनाफा कमाने वाली KIMS Hospitals का PAT इस तिमाही में घटकर सिर्फ ₹37.4 करोड़ रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनी की विस्तार योजनाएं और नए हॉस्पिटल्स को शुरू करने में आई लागत बताई जा रही है।
विस्तार पर कंपनी का फोकस
KIMS Hospitals अपनी बेड क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है और अब यह 7,459 बेड्स तक पहुंच गई है। इसमें हाल ही में कोंडापुर में 787 और पालाक्कड़ में 208 बेड्स का इजाफा शामिल है। कंपनी केरल, महाराष्ट्र और कर्नाटक में नए यूनिट्स को खोलने और उन्हें मुनाफे में लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। इनमें से कई यूनिट्स पहले ही EBITDA पॉजिटिव हो चुके हैं।
आगे क्या उम्मीद करें?
निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि कंपनी कैसे अपने विस्तार से जुड़ी लागतों को मैनेज करती है और नए यूनिट्स को कब तक मुनाफे में ला पाती है। आने वाली तिमाहियों में ऑक्यूपेंसी रेट (occupancy rate) में सुधार और रेवेन्यू ग्रोथ को बॉटम-लाइन परफॉरमेंस में बदलने की क्षमता पर फोकस रहेगा।
जोखिम (Risks)
- नए यूनिट्स के खुलने और उनके संचालन से जुड़ी ऊंची लागतों के कारण मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है।
- अलग-अलग जगहों और हॉस्पिटल्स में ऑक्यूपेंसी रेट में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
अहम आंकड़े (Context Metrics)
Q1 FY27 में KIMS की कुल बेड क्षमता 7,459 थी। इनपेशेंट (IP) वॉल्यूम में 26.6% और आउटपेशेंट (OP) वॉल्यूम में 28.5% की सालाना बढ़ोतरी हुई। समग्र ऑक्यूपेंसी रेट 49.0% रहा। तिमाही के दौरान कई नए यूनिट्स EBITDA पॉजिटिव स्थिति में पहुंच गए।
