Jeena Sikho Lifecare का शानदार FY26 प्रदर्शन
₹222.18 करोड़ का नेट प्रॉफिट; ₹801.35 करोड़ का रेवेन्यू; ₹4.50 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान।
क्या हुआ?
Jeena Sikho Lifecare Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने पिछले साल के मुकाबले अपने आफ्टर टैक्स प्रॉफिट में 177.9% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अब ₹222.18 करोड़ हो गया है। वहीं, ऑपरेशंस से होने वाले रेवेन्यू में 70.8% की बढ़कर ₹801.35 करोड़ हो गया है।
इसके अलावा, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹4.50 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। कंपनी ने यह भी बताया है कि उन्होंने UAE स्थित Back to Roots Ayurveda में 51% हिस्सेदारी लगभग ₹42.12 करोड़ में खरीदी है, जिसमें से 25% का भुगतान तुरंत कर दिया गया है।
यह क्यों मायने रखता है?
कंपनी का यह मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस इसके बिजनेस के बड़े विस्तार और बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी को दर्शाता है। डिविडेंड का ऐलान भविष्य की कमाई को लेकर मैनेजमेंट के भरोसे और शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह एक्विजिशन (Acquisition) कंपनी के ग्लोबल विस्तार की दिशा में एक अहम कदम है, जो नए रेवेन्यू सोर्स खोल सकता है।
पिछली कहानी
पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में Jeena Sikho Lifecare ने ₹469.07 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹79.94 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। FY26 के लिए कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) बढ़कर ₹17.87 हो गया है, जो FY25 में ₹6.43 था।
अब क्या बदलेगा?
UAE की कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने के बाद, Jeena Sikho Lifecare अब पहली बार इस एक्विजिशन के फाइनेंशियल को कंसॉलिडेट (Consolidate) करेगी, जिससे कंपनी का ऑपरेशनल स्केल बड़ा दिखेगा। डिविडेंड का यह प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगा, जो आने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में होगा।
किन जोखिमों पर नज़र रखें?
कंपनी ने 21 नवंबर, 2025 से लागू होने वाले नए लेबर कोड्स के कारण ₹1.25 करोड़ के अतिरिक्त फाइनेंशियल इंपैक्ट को पहचाना है, जो भविष्य में ऑपरेटिंग कॉस्ट को बढ़ा सकता है। UAE एक्विजिशन (Acquisition) भी अभी पेंडिंग रेगुलेटरी फॉर्मेलिटीज (Regulatory Formalities) के अधीन है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक UAE एक्विजिशन (Acquisition) के लिए रेगुलेटरी फॉर्मेलिटीज (Regulatory Formalities) के सफल समापन पर करीब से नजर रखेंगे। इसके अलावा, नए लेबर कोड्स का ऑपरेटिंग कॉस्ट पर पड़ने वाले असर और कंपनी की इंटरनेशनल बिजनेस को इंटीग्रेट (Integrate) करने की रणनीति पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
