Ind-Swift Laboratories: कर्ज से मुक्त हुई कंपनी, FY29 तक ₹1,200 करोड़ का रेवेन्यू लक्ष्य

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AuthorMehul Desai|Published at:
Ind-Swift Laboratories: कर्ज से मुक्त हुई कंपनी, FY29 तक ₹1,200 करोड़ का रेवेन्यू लक्ष्य

Ind-Swift Laboratories अब एक कर्ज-मुक्त (debt-free) कंपनी बन गई है। NCLT से मंजूरी के बाद हुए मर्जर के बाद कंपनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए **₹641.29 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है और अब **₹1,200 करोड़** के टारगेट पर नजर गड़ाए हुए है।

फाइनेंशियल टर्नअराउंड की कहानी

Ind-Swift Laboratories ने Ind-Swift Limited के साथ मर्जर पूरा कर लिया है, जिसके बाद यह कंपनी अब केवल फॉर्मूलेशन (formulations) बिजनेस पर ध्यान देगी। कंपनी के लिए पिछला साल बेहद शानदार रहा, जिसमें ऑपरेटिंग EBITDA ₹44.78 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹0.40 करोड़ का नुकसान था। वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) ₹41.42 करोड़ रहा है।

क्यों है निवेशकों के लिए खास?

कर्ज मुक्त होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनी का फाइनेंस कॉस्ट काफी कम हो जाएगा, जो सीधे तौर पर प्रॉफिट मार्जिन में दिखेगा। अब कंपनी API और CRAMS बिजनेस से बाहर निकलकर हाई-मार्जिन वाले फॉर्मूलेशन पर फोकस कर रही है।

ग्रोथ का प्लान

कंपनी ने रेवेन्यू बढ़ाने के लिए तीन मुख्य रास्ते चुने हैं:

  • इंटरनेशनल CDMO: Viatris और Manx जैसे ग्लोबल प्लेयर्स के साथ साझेदारी।
  • एक्सपोर्ट: UAE, अफ्रीका और साउथ ईस्ट एशिया में अपनी ब्रांडेड दवाओं को पहुंचाना, जहां ग्रॉस मार्जिन 50-55% तक है।
  • डोमेस्टिक मार्केट: बच्चों की दवाओं (paediatric portfolio) पर विशेष जोर।

क्षमता और रिस्क

Samba फैसिलिटी में कैप्सूल की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दोगुना और ऑइंटमेंट की क्षमता को 150% तक बढ़ाया गया है। फिलहाल प्लांट 40% क्षमता पर चल रहा है, जिसका मतलब है कि बिना बड़े निवेश के कंपनी प्रोडक्शन बढ़ा सकती है। हालांकि, 400 से ज्यादा नए डोजियर फाइल करने का लक्ष्य एक बड़ी चुनौती है, और एक्सपोर्ट पर निर्भरता के कारण जियोपॉलिटिकल रिस्क और करेंसी में उतार-चढ़ाव पर नजर रखना जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.