Ind-Swift Laboratories FY26 नतीजे: रेवेन्यू बढ़ा, पर बेस इफेक्ट से घटा मुनाफा
Ind-Swift Laboratories ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए अपने स्टैंडअलोन नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू ₹635.89 करोड़ रहा, जो कि वित्त वर्ष 2025 के ₹562.17 करोड़ की तुलना में 13.11% ज्यादा है।
हालांकि, इसी अवधि के लिए स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Net Profit) घटकर ₹42.56 करोड़ रह गया। यह वित्त वर्ष 2025 के ₹256.09 करोड़ के मुकाबले 83.38% की भारी गिरावट है।
निवेशकों के लिए खास बात: कंपनी का रेवेन्यू बढ़ना, खासकर हालिया अमलगमेशन (Amalgamation) के बाद, बिजनेस के विस्तार का संकेत देता है। लेकिन, नेट प्रॉफिट में इतनी बड़ी गिरावट चिंता का विषय हो सकती है। यह गिरावट मुख्य रूप से पिछले साल (FY2025) दर्ज की गई ₹215.88 करोड़ की असाधारण आय (Exceptional Income) की वजह से है, जो इस साल (FY2026) नहीं है। इस साल कंपनी को ₹11.01 करोड़ का असाधारण नुकसान (Exceptional Loss) हुआ है।
कॉर्पोरेट एक्शन और आगे क्या?
Ind Swift Limited (ISL) का Ind-Swift Laboratories के साथ अमलगमेशन 8 अगस्त, 2025 से प्रभावी हो गया है। इसके अलावा, 1.95 करोड़ वारंट (Warrants) को इक्विटी शेयरों में बदला गया, जबकि 65 लाख वारंट जब्त कर लिए गए। अब निवेशकों को संयुक्त कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए।
ध्यान देने योग्य जोखिम:
कंपनी की एक छोटी सी बात पर नजर रखनी होगी - यूनिट-IV, बद्दी (Baddi) की जमीन की बिक्री से ₹1.10 करोड़ की बकाया राशि का मिलना। यह राशि बड़ी नहीं है, लेकिन इसका मिलना संपत्ति की बिक्री को अंतिम रूप देगा।
