Hamps Bio Ltd ने अपने FY2025-26 के नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी की कमाई तो बढ़ी है, लेकिन नेट लॉस (Net Loss) में भी भारी इज़ाफ़ा हुआ है।
Hamps Bio Ltd का 19वां एनुअल रिपोर्ट (Annual Report) जारी
FY2025-26 में Hamps Bio Ltd की स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹851.65 लाख रही, जो पिछले साल के ₹666.88 लाख से ज़्यादा है। लेकिन, कंपनी को इस फाइनेंशियल ईयर में ₹65.49 लाख का नेट लॉस (Net Loss) हुआ है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने ₹29.77 लाख का मुनाफा (Profit) कमाया था। कंसॉलिडेटेड (Consolidated) रेवेन्यू भी बढ़कर ₹847.46 लाख हो गई, जबकि नेट लॉस ₹73.87 लाख रहा।
क्यों चिंता में निवेशक?
कमाई बढ़ने के बावजूद कंपनी का लॉस में जाना निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। रिपोर्ट में कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) डेवलपमेंट का ज़िक्र है। सूरत प्लांट को पूरी तरह से चालू कर दिया गया है, जिसमें नई फ्रीज़-ड्राइंग (Freeze-drying) कैपेसिटी भी जोड़ी गई है। साथ ही, HSDL Innovative Private Limited नाम की सब्सिडियरी (Subsidiary) का अधिग्रहण भी पूरा हो गया है। कंपनी को अपने अंकलेश्वर प्लांट में कोसर सर्टिफिकेशन (Kosher Certification) और सोलर पावर प्लांट (Solar Power Plant) से भी बेहतर मार्केट एक्सेस (Market Access) और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) की उम्मीद है।
कंपनी की बैकस्टोरी
Hamps Bio Ltd अपने मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) क्षमता को बढ़ाने और वैल्यू-एडेड फूड सेगमेंट (Value-added food segment) पर फोकस कर रही है। HSDL Innovative Private Limited, जो फ्रीज़-ड्रायड फूड सेक्टर में काम करती है, उसका अधिग्रहण कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो (Product Portfolio) को मजबूत करने की दिशा में एक स्ट्रेटेजिक (Strategic) कदम है। कंपनी ने हाल ही में अगस्त 2025 में 1:1 बोनस शेयर इश्यू (Bonus Share Issue) को भी मंजूरी दी थी।
आगे क्या?
कंपनी अपनी रजिस्टर्ड ऑफिस को सूरत शिफ्ट करने का प्रस्ताव रख रही है, जिसके लिए शेयरहोल्डर (Shareholder) की मंजूरी 9 सितंबर 2026 को होने वाली AGM (Annual General Meeting) में ली जाएगी। नई फ्रीज़-ड्राइंग कैपेसिटी और सोलर पावर प्लांट जैसी पहलों से भविष्य में एफिशिएंसी (Efficiency) और मार्केट रीच (Market Reach) में सुधार की उम्मीद है।
जोखिमों पर नज़र
कंपनी के लिए सबसे बड़े जोखिमों में से एक है उसका बढ़ता डेट-इक्विटी रेश्यो (Debt-Equity Ratio)। यह स्टैंडअलोन बेसिस पर 0.34 से बढ़कर 0.78 और कंसॉलिडेटेड बेसिस पर 0.85 हो गया है। ऐसे में, कंपनी का अगले फाइनेंशियल ईयर में अपने बढ़े हुए कर्ज को मैनेज करना और मुनाफे में वापस लौटना अहम होगा।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को अगले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी की परफॉरमेंस (Performance) पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। खासकर, डेट मैनेजमेंट (Debt Management), प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) के ट्रेंड्स और नई सब्सिडियरी के इंटीग्रेशन (Integration) पर ध्यान देना ज़रूरी होगा।
