सुप्रीम कोर्ट ने Fortis Healthcare की याचिका को खारिज करते हुए फोरेंसिक ऑडिट का रास्ता साफ कर दिया है। कानूनी मोर्चे पर इस हलचल के बावजूद, प्रमोटर IHH Healthcare ने अगले पांच वर्षों में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर **51%** करने और 2031 तक **10,000** बेड की क्षमता तक पहुंचने का अपना बड़ा लक्ष्य घोषित किया है।
कोर्ट के फैसले का असर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा अनिवार्य की गई फोरेंसिक ऑडिट अब आगे बढ़ेगी, जिसमें कंपनी के पुराने सौदों की जांच की जाएगी। हालांकि, प्रमोटर IHH Healthcare ने साफ कर दिया है कि वे जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे। कंपनी का स्टैंड है कि 2018 में उनका निवेश पूरी पारदर्शिता के साथ और रेगुलेटेड प्रक्रिया के तहत हुआ था।
भविष्य का रोडमैप (Expansion Plan)
कानूनी पचड़ों के बीच भी कंपनी का मैनेजमेंट अपने ऑपरेशनल लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित है। फिलहाल प्रमोटर के पास 31% हिस्सेदारी है, जिसे अगले 3 से 5 सालों में बढ़ाकर 51% के मेजॉरिटी मार्क तक ले जाने की योजना है। कंपनी का लक्ष्य भारत में Fortis और Gleneagles प्लेटफॉर्म को जोड़कर अपनी क्षमता को 10,000 बेड तक पहुंचाने का है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों के लिए यह एक गवर्नेंस माइलस्टोन है। जहां एक तरफ ऑडिट से अनिश्चितता बनी रह सकती है, वहीं दूसरी तरफ प्रमोटर द्वारा स्टेक बढ़ाने का फैसला कंपनी की एसेट्स और भविष्य की ग्रोथ पर भरोसे को दर्शाता है। अब निवेशकों की नजरें ऑडिट की रिपोर्ट और IHH द्वारा शेयर अधिग्रहण की खबरों पर टिकी होंगी, जो स्टॉक की चाल को दिशा देंगी।
