Delhi High Court ने Fortis Healthcare के पूर्व प्रमोटर्स, यानी सिंह ब्रदर्स द्वारा शेयरहोल्डिंग में किए गए बदलावों की जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया है। कंपनी ने साफ किया है कि इस कानूनी विवाद से उसका कोई लेना-देना नहीं है और उस पर कोई भी वित्तीय देनदारी नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली हाई कोर्ट ने 31 अगस्त, 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त करने का निर्देश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य सिंह ब्रदर्स के दौर में कंपनी की शेयरहोल्डिंग में हुई हलचल और मालिकाना हक के ट्रांसफर की बारीकी से जांच करना है। कोर्ट यह समझना चाहता है कि उस दौरान बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और कंपनी ने किस तरह की भूमिका निभाई थी।
निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?
यह जांच Daiichi Sankyo Company, Limited द्वारा शुरू की गई कानूनी कार्यवाही का हिस्सा है। हालांकि, Fortis Healthcare ने एक्सचेंज को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया है कि कंपनी इस मूल मुकदमे का हिस्सा नहीं है और न ही वह कोई 'जजमेंट डेटर' (Judgment Debtor) है। कंपनी के मुताबिक, यह ऑडिट पूरी तरह से जांच के उद्देश्य से है और इस पर कोई भी जुर्माना या वित्तीय दंड नहीं लगाया गया है।
आगे की राह
अभी कंपनी का मैनेजमेंट अपने कानूनी सलाहकारों के साथ इस ऑर्डर का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। निवेशकों को फिलहाल किसी भी प्रकार की घबराहट की जरूरत नहीं है, लेकिन भविष्य में आने वाली रेगुलेटरी फाइलिंग्स और फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट पर नजर रखना जरूरी होगा। कंपनी का फोकस अब इस प्रक्रिया में सहयोग करने पर है ताकि पास्ट गवर्नेंस और ओनरशिप ट्रांजिशन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
