Family Care Hospitals के FY26 के नतीजे आ गए हैं। कंपनी ने अपनी फिजिकल क्लिनिकल सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिसके चलते रेवेन्यू गिरकर **₹0.21 करोड़** रह गया है। हालांकि, कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के **₹44.15 करोड़** के मुकाबले घटकर **₹8.68 करोड़** पर आ गया है।
बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही कंपनी
Family Care Hospitals ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की एनुअल रिपोर्ट में जानकारी दी है कि उन्होंने मीरा रोड स्थित अपने फ्लैगशिप अस्पताल समेत सभी फिजिकल मल्टी-स्पेशियलिटी क्लिनिकल ऑपरेशंस को बंद कर दिया है। अब कंपनी का पूरा ध्यान डिजिटल हेल्थकेयर डिलीवरी और मोबाइल-आधारित डॉक्टर रजिस्ट्री सर्विस पर है। जनवरी 2026 में हुए रैनसमवेयर हमले के बाद कंपनी को अपने आईटी और डेटा सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़े बदलाव करने पड़े थे।
क्यों चिंता का विषय है रेवेन्यू?
फिजिकल संपत्तियों से किनारा करने के बाद कंपनी की कमाई पर गहरा असर पड़ा है। पिछले साल रेवेन्यू ₹7.90 करोड़ था, जो अब घटकर मात्र ₹0.21 करोड़ रह गया है। इसके अलावा, माहीम डिवीजन के ₹3.68 करोड़ के रेंट एरियर मामले के लिए कंपनी को ₹4.42 करोड़ का प्रोविजन बनाना पड़ा है, जो बैलेंस शीट पर दबाव डाल रहा है।
कानूनी और रेगुलेटरी चुनौतियां
कंपनी कई मोर्चों पर कानूनी लड़ाई लड़ रही है। मुंबई स्मॉल कॉज कोर्ट में चल रहे केस के अलावा, कंपनी को SEBI की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा है, जिसके तहत ₹35.10 लाख की पेनल्टी चुकाई गई। वहीं, One Life Capital Advisors Limited से जुड़े मामले के कारण कंपनी के प्रिफरेंशियल वारंट जारी करने की योजना भी फिलहाल टल गई है।
आगे की राह
मैनेजमेंट ने इस दौर को 'स्ट्रक्चरल ट्रांजिशन' का नाम दिया है। अब कंपनी का पूरा फोकस कानूनी विवादों को सुलझाने और डिजिटल हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स के जरिए पूंजी जुटाने पर है। इन्वेस्टर्स के लिए ध्यान रखने वाली बात यह है कि कंपनी की सफलता पूरी तरह से माहीम प्रॉपर्टी विवाद के निपटारे और डिजिटल मॉडल की कमाई पर निर्भर करेगी।
