Eris Lifesciences ने वित्त वर्ष 26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **8%** बढ़कर **₹3,129 करोड़** रहा है, जबकि टैक्स लाभ के चलते नेट प्रॉफिट (PAT) **73%** उछलकर **₹648 करोड़** पर पहुंच गया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी ने इस साल बेहतरीन मुनाफा दर्ज किया है, जिसका बड़ा हिस्सा ₹150 करोड़ का वन-टाइम डेफर्ड टैक्स बेनिफिट है। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 35.8% हो गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में 35.2% था। वहीं, कंपनी का EPS ₹46.7 दर्ज किया गया है।
इंसुलिन सेगमेंट का दबदबा
Eris Lifesciences अब पूरी तरह से 'इंजेक्टेबल डायबिटीज़' सेगमेंट पर फोकस कर रही है। इसका असर नतीजों में दिख रहा है, जहां RHI कार्ट्रिज का मार्केट शेयर अप्रैल 2024 के 8% से बढ़कर वित्त वर्ष 26 के अंत तक 25% हो गया है। भोपाल बायोलॉजिक्स फैसिलिटी भी अब पूरी तरह चालू है और अगस्त 2025 से अब तक वहां 50 लाख (5 million) से ज्यादा यूनिट्स तैयार हो चुकी हैं।
चिंता की बात: रेगुलेटरी अड़चनें
सब कुछ अच्छा होने के बावजूद, मार्च 2026 में EU-GMP इंस्पेक्शन के दौरान मिली नॉन-कंप्लायंस ऑब्जर्वेशन्स चिंता का विषय हैं। इसके चलते कंपनी के CDMO रेवेन्यू में देरी हो सकती है, जो पहले Q1 FY27 में शुरू होने की उम्मीद थी। इसके अलावा, कंपनी के कोर ओएचए (OHA) और कार्डियक सेगमेंट में भी डिमांड की सुस्ती देखी गई है, जिसे मैनेजमेंट FY27 में ठीक करने की कोशिश करेगा।
आगे क्या होगा?
निवेशकों को अब कंपनी की ओर से EU-GMP री-इंस्पेक्शन की टाइमलाइन और CDMO बिजनेस से कमाई शुरू होने का इंतजार करना चाहिए। Q2 FY27 में इंसुलिन कार्ट्रिज का कमर्शियलाइजेशन कंपनी के लिए अगला बड़ा माइलस्टोन साबित होगा।
