Dr. Reddy's: विशाखापट्टनम प्लांट पर USFDA की सख्ती, जांच में मिलीं **3** आपत्तियां

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AuthorAditya Rao|Published at:
Dr. Reddy's: विशाखापट्टनम प्लांट पर USFDA की सख्ती, जांच में मिलीं **3** आपत्तियां

Dr. Reddy's Laboratories की विशाखापट्टनम स्थित FTO-9 फैसिलिटी में USFDA ने हाल ही में निरीक्षण किया है। इस प्री-अप्रूवल इंस्पेक्शन के बाद एजेंसी ने फॉर्म **483** के तहत **3** ऑब्जर्वेशन दर्ज किए हैं, जिसे कंपनी को तय समयसीमा में सुलझाना होगा।

क्या है पूरा मामला?

Dr. Reddy's Laboratories की विशाखापट्टनम स्थित FTO-9 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में 8 अक्टूबर से 9 अक्टूबर, 2026 के बीच USFDA का प्री-अप्रूवल इंस्पेक्शन (PAI) हुआ। इस जांच के बाद अमेरिकी रेगुलेटर ने फॉर्म 483 जारी किया है, जिसमें 3 अहम आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह?

यह निरीक्षण सीधे तौर पर कंपनी के भविष्य के प्रोडक्ट अप्रूवल से जुड़ा है। हालांकि फॉर्म 483 का मिलना कोई फाइनल रिजेक्शन नहीं है, लेकिन यह एक आधिकारिक संकेत है कि कंपनी को अपनी मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में सुधार (Remediation) करना होगा।

कंपनी का मैनेजमेंट क्या कह रहा है?

Dr. Reddy's मैनेजमेंट ने इन आपत्तियों को स्वीकार कर लिया है। कंपनी की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि वे रेगुलेटरी टाइमलाइन के भीतर इन 3 बिंदुओं पर काम कर रहे हैं और अपना जवाब USFDA को जल्द सौंपेंगे।

आगे क्या होगा?

बाजार की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी कितनी जल्दी इन आपत्तियों को दूर करती है। अगर समाधान में देरी होती है, तो इस प्लांट से जुड़े नए प्रोडक्ट्स को अमेरिकी बाजार में मंजूरी मिलने में मुश्किलें आ सकती हैं। निवेशकों को कंपनी की ओर से आने वाले आधिकारिक अपडेट पर नजर रखनी चाहिए, जो 'एस्टेब्लिशमेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट' (EIR) या सुधारात्मक कार्रवाई के सफल समापन की पुष्टि करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.