पैसों की तंगी से जूझ रही Dr Lalchandani Labs, ऑडिटर की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
Dr Lalchandani Labs लिमिटेड ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले 86% की भारी गिरावट आई है, जो ₹0.06 करोड़ (यानी ₹6.35 लाख) पर आ गया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में यह ₹0.42 करोड़ (यानी ₹41.72 लाख) था। वहीं, कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में भी थोड़ी कमी आई है, जो FY26 में ₹4.19 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹4.45 करोड़ था।
क्यों है चिंता की बात?
कंपनी के इन नतीजों से भी ज्यादा चिंता की बात इसके स्टेटुटरी ऑडिटर ATN & Co. की क्वालिफाइड रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट से कंपनी की वित्तीय स्थिति और कामकाज में गंभीर समस्याओं का पता चलता है, जिससे इसके भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
ऑडिटर की रिपोर्ट में कई बड़ी खामियों को उजागर किया गया है। इनमें शामिल हैं:
- बैंकों द्वारा कंपनी के खातों को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) की श्रेणी में डालना।
- कंपनी के पास पर्याप्त कैश होने के बावजूद लोन की प्रिंसिपल और इंटरेस्ट की पेमेंट में डिफॉल्ट करना।
- प्रोविडेंट फंड (PF), ESIC और TDS जैसे स्टेटुटरी ड्यूज (कानूनी देनदारियों) के भुगतान में देरी।
- कंपनी ने ग्रेच्युटी और लीव एन्कैशमेंट देनदारियों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया, जो अकाउंटिंग स्टैंडर्ड-15 का उल्लंघन है।
आगे क्या होगा?
कंपनी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए, अपने राइट्स इश्यू (Rights Issue) के फंड के लिए Brickwork Ratings India Private Limited को नई मॉनिटरिंग एजेंसी नियुक्त किया है। इन्होंने Infomerics Valuation and Ratings Limited की जगह ली है। इसके अलावा, कंपनी ने बैंकों और NBFCs के साथ एक 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) करके ₹0.61 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन (असाधारण लाभ) दर्ज किया है।
निवेश पर जोखिम
निवेशकों को कंपनी के NPA स्टेटस, लोन डिफॉल्ट और स्टेटुटरी ड्यूज के भुगतान में देरी जैसी बातों पर खास ध्यान देना चाहिए। OTS से हुए लाभ पर कंपनी का मुनाफा निर्भर होना, उसकी अंदरूनी कमजोरी को दिखाता है। ऑडिटर की क्वालिफाइड राय, कंपनी के गवर्नेंस और वित्तीय स्थिरता के लिए बड़े जोखिमों की ओर इशारा करती है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को अब कंपनी की कर्ज चुकाने की क्षमता, स्टेटुटरी ड्यूज को क्लियर करने की प्रक्रिया और भविष्य में ऑडिटर की चिंताओं को दूर करने के प्रयासों पर कड़ी नजर रखनी होगी। साथ ही, OTS का असर और राइट्स इश्यू के फंड का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण रहेगा।
