कोरोना रेमेडीज को मिला बड़ा सर्टिफिकेशन!
Corona Remedies Limited ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के अहमदाबाद स्थित भायला में मौजूद हार्मोन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को EU-GMP (यूरोपियन यूनियन गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) सर्टिफिकेशन मिल गया है। इतना ही नहीं, इसी लोकेशन पर मौजूद ओरल सॉलिड डोजेज (OSD) फैसिलिटी का EU-GMP सर्टिफिकेशन भी रिन्यू हो गया है।
क्यों है यह सर्टिफिकेशन इतना खास?
यह सर्टिफिकेशन Corona Remedies की 'वन वर्ल्ड. वन क्वालिटी' वाली रणनीति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसके मिलने से कंपनी अब भारतीय डोमेस्टिक मार्केट के साथ-साथ रेगुलेटेड और सेमी-रेगुलेटेड इंटरनेशनल मार्केट्स में भी अपने प्रोडक्ट्स की सप्लाई कर सकेगी। इससे कंपनी के संभावित ग्राहकों का दायरा बढ़ेगा और रेवेन्यू के नए रास्ते खुलेंगे।
कंपनी की क्या है प्लानिंग?
Corona Remedies खुद को 'टॉप 30 फार्मास्यूटिकल कॉर्पोरेट्स' में से एक मानती है। कंपनी का लक्ष्य वुमेंस हेल्थकेयर, कार्डियो-डायबिटो, पेन मैनेजमेंट और यूरोलॉजी जैसे थेरेप्यूटिक एरियाज में एक ग्लोबल भरोसेमंद पार्टनर बनना है। हार्मोन पोर्टफोलियो के लिए EU-GMP सर्टिफिकेशन इस ग्लोबल महत्वाकांक्षा को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है।
आगे क्या होगा?
इस सर्टिफिकेशन के साथ, Corona Remedies अब इंटरनेशनल मार्केट्स में अपनी पैठ बनाने और विस्तार करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर सकेगी। कंपनी का फोकस अपने हार्मोन फैसिलिटी का इस्तेमाल एक्सपोर्ट सेल्स बढ़ाने और ग्लोबल मार्केट शेयर को बढ़ाने पर रहेगा। इससे कंपनी की ओवरऑल ग्रोथ में तेजी आने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्या हैं जोखिम?
यह एक बड़ी ऑपरेशनल उपलब्धि तो है, लेकिन निवेशकों को यह देखना होगा कि यह सर्टिफिकेशन असल एक्सपोर्ट रेवेन्यू में कैसे बदलता है। कंपनी को इस रेगुलेटरी फायदे का लाभ उठाकर कॉम्पिटिटिव इंटरनेशनल मार्केट्स में अपनी मार्केट शेयर और प्रॉफिटेबिलिटी को बढ़ाना होगा।
पीयर कंपनियों से तुलना
कई भारतीय फार्मा कंपनियां रेगुलेटेड मार्केट्स में पैठ बनाने के लिए EU-GMP और US FDA अप्रूवल पर तेजी से फोकस कर रही हैं। Sun Pharmaceutical Industries, Dr. Reddy's Laboratories और Cipla जैसी कंपनियां इस तरह के रेगुलेटरी कंप्लायंस के आधार पर अपनी मजबूत इंटरनेशनल मौजूदगी बना चुकी हैं।
क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को कंपनी के तिमाही नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए ताकि एक्सपोर्ट रेवेन्यू में बढ़ोतरी का पता चल सके। हार्मोन पोर्टफोलियो से संबंधित नए मार्केट्स में एंट्री और ग्लोबल पार्टनरशिप पर नजर रखना इस सर्टिफिकेशन के सफल इस्तेमाल का महत्वपूर्ण इंडिकेटर होगा।
