फार्मा दिग्गज Cipla के सितंबर तिमाही के नतीजे निवेशकों को मायूस करने वाले हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के **₹1,353.37 करोड़** से घटकर **₹851.51 करोड़** पर आ गया है, साथ ही रेवेन्यू में भी गिरावट दर्ज की गई है।
मुनाफे में बड़ी गिरावट
सितंबर तिमाही के दौरान Cipla का प्रदर्शन उम्मीदों से कमजोर रहा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 37% से अधिक फिसल गया है। रेवेन्यू में भी कमी आई है, जो पिछले साल के ₹7,589.44 करोड़ के मुकाबले घटकर ₹7,403.93 करोड़ रह गया है। इस दौरान कंपनी का बेसिक EPS (Earnings Per Share) भी ₹16.73 से गिरकर ₹10.86 पर आ गया है।
NPPA के साथ कानूनी पेंच
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता ₹2,011 करोड़ का कानूनी विवाद है। यह मामला नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के साथ चल रहा है, जिसमें ₹863 करोड़ का मूलधन (Principal) और ₹1,148 करोड़ का ब्याज शामिल है। कंपनी का कहना है कि वे कानूनी तौर पर अपना पक्ष मजबूती से रख रहे हैं और फिलहाल इसके लिए कोई प्रोविजन नहीं बनाया है। हालांकि, कोर्ट का कोई भी प्रतिकूल फैसला कंपनी की बैलेंस शीट पर भारी पड़ सकता है।
अकाउंटिंग पॉलिसी में बदलाव
कंपनी ने 1 अप्रैल, 2026 से अपनी अकाउंटिंग पॉलिसी में बदलाव किया है। इसके तहत मार्केटिंग और प्रमोशनल खर्चों को अब रेवेन्यू में कटौती के तौर पर दिखाया जा रहा है, न कि सेल प्रमोशन खर्च के रूप में। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इससे कैश फ्लो या कुल मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन रेवेन्यू के तुलनात्मक आंकड़ों में इसका असर दिख रहा है।
भविष्य की राह
कंपनी फिलहाल अपने सबसिडियरी Inzpera Healthsciences Limited के Cipla में विलय के लिए NCLT की मंजूरी का इंतजार कर रही है। आने वाले समय में बाजार की नजर कंपनी के मार्जिन रिकवरी और कानूनी विवादों के निपटारे पर टिकी रहेगी।
