Bilcare Limited ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **₹248.43 करोड़** दर्ज किया गया है। हालांकि, मुनाफे में बड़ी गिरावट और ऑडिटर्स द्वारा 'गोइंग कंसर्न' (going concern) पर उठाए गए सवालों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, साथ ही कंपनी SFIO की जांच के घेरे में भी है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और चुनौतियां
सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू तो बढ़ा है, लेकिन नेट प्रॉफिट में भारी गिरावट देखने को मिली है। सितंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर ₹1.07 करोड़ रह गया है, जो पिछली तिमाही में ₹14.97 करोड़ था।
बड़े बदलाव और लीडरशिप
बदलावों के बीच, कंपनी ने फाउंडर Mohan Bhandari को नया चेयरमैन नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 3 नवंबर, 2026 से प्रभावी हो गई है। Shreyans Bhandari अब भी मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के तौर पर काम करना जारी रखेंगे।
क्यों है निवेशकों के लिए रिस्क?
- ऑडिटर्स की चेतावनी: स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स ने कंपनी की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए 'गोइंग कंसर्न' को लेकर रिस्क फ्लैग किया है।
- SFIO जांच: कंपनी के खिलाफ 6 जून, 2026 को MCA के आदेश के बाद SFIO की जांच चल रही है।
- कानूनी मुसीबतें: कंपनी पर ₹19.41 करोड़ के पेनल्टी इंटरेस्ट का मामला चल रहा है। इसके अलावा, NCLT के निर्देश पर ₹2.93 करोड़ की राशि Investor Education and Protection Fund (IEPF) में ट्रांसफर की गई है।
मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी का GCS बिजनेस सेगमेंट कैश फ्लो को बनाए रखने में मदद कर रहा है, जो इसकी सर्वाइवल के लिए अहम है। निवेशकों को आने वाले समय में कानूनी अपडेट्स और जांच की प्रगति पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
