फार्मा दिग्गज Aurobindo Pharma ने अपनी दो पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी, Auroactive Pharma और Apitoria Pharma के विलय को बोर्ड की मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य कंपनी के API बिजनेस को सुव्यवस्थित करना है।
विलय की पूरी गणित
बोर्ड ने हैदराबाद के National Company Law Tribunal (NCLT) के पास विलय की योजना दाखिल करने की अनुमति दे दी है। इस पुनर्गठन के जरिए कंपनी अपने API (Active Pharmaceutical Ingredients) सेगमेंट को एक साथ लाना चाहती है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़ों पर गौर करें तो, Auroactive Pharma का टर्नओवर ₹701.3 मिलियन था, जबकि Apitoria Pharma का टर्नओवर ₹64,430.8 मिलियन दर्ज किया गया था।
शेयर अदला-बदली का अनुपात
इस विलय के तहत, Auroactive Pharma के हर 10,000 शेयर के बदले Apitoria Pharma के 97 इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में कुल 2,395,900 नए शेयर जारी होंगे। वैल्यूएशन पूरी तरह से इंडिपेंडेंट पार्टी द्वारा तय किया गया है।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
Aurobindo Pharma लिमिटेड के शेयरधारकों के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। चूंकि ये दोनों कंपनियां पहले से ही पैरेंट कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी हैं, इसलिए शेयरहोल्डिंग पैटर्न या कंपनी की लिस्टिंग स्टेटस पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। यह पूरी तरह से एक इंटरनल स्ट्रक्चरिंग है ताकि मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की क्षमता को बेहतर ढंग से इस्तेमाल किया जा सके।
