Aptus Pharma के नतीजों ने निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने H1 2026-27 के दौरान अपना नेट प्रॉफिट **₹5.08 करोड़** दर्ज किया है और टोटल इनकम **₹48.92 करोड़** तक पहुंच गई है। कंपनी अब **2028** तक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी के लिए यह छमाही काफी दमदार रही है। अगर हम पिछले फाइनेंशियल ईयर की समान अवधि की बात करें, तो वहां प्रॉफिट ₹1.75 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹5.08 करोड़ हो गया है। कंपनी की टोटल इनकम में भी जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो पिछले साल के ₹14.38 करोड़ से बढ़कर इस बार ₹48.92 करोड़ पर पहुंच गई है। वहीं, EBITDA ₹7.68 करोड़ दर्ज किया गया है।
बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव की तैयारी
फिलहाल कंपनी 'एसेट-लाइट' (Asset-light) मॉडल पर काम कर रही है और WHO-GMP सर्टिफाइड सुविधाओं के साथ साझेदारी कर 300 से ज्यादा फॉर्मूलेशन के पोर्टफोलियो को मैनेज कर रही है। हालांकि, मैनेजमेंट का विजन अब बदल रहा है।
कंपनी ने 2028-2029 के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है:
- मैन्युफैक्चरिंग: 2028 तक कंपनी अपनी 20% मैन्युफैक्चरिंग जरूरतों को खुद पूरा करने की क्षमता विकसित करेगी।
- डिस्ट्रीब्यूशन: मार्च 2029 तक पूरे भारत (Pan-India) में अपनी पहुंच बनाने का लक्ष्य है।
- एक्सपोर्ट: ग्लोबल वर्टिकल के जरिए कंपनी अपने एक्सपोर्ट कारोबार का भी विस्तार करेगी।
निवेशकों के लिए जोखिम और चेतावनी
बेशक कंपनी का भविष्य का रोडमैप आकर्षक है, लेकिन एसेट-लाइट मॉडल से खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की ओर बढ़ने में 'एग्जीक्यूशन रिस्क' (Execution Risk) भी शामिल हैं। भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर और नए भौगोलिक क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा का असर मार्जिन पर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
