Tulsyan NEC Share Price: पावर प्लांट बंद, कंपनी को ₹21.41 Cr का घाटा, निवेशकों की बढ़ी चिंता

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Tulsyan NEC Share Price: पावर प्लांट बंद, कंपनी को ₹21.41 Cr का घाटा, निवेशकों की बढ़ी चिंता

Tulsyan NEC ने Q1 FY27 के लिए **₹21.41 करोड़** का कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले काफी ज्यादा है। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी बुरी तरह गिरा है क्योंकि पावर प्लांट (Power Plant) लगभग पूरे क्वार्टर बंद था। इसके अलावा, कंपनी ने अपने NCD (Non-Convertible Debentures) की शर्तों में बदलाव किए हैं, जिसमें कूपन पेमेंट पर मोरेटोरियम (Moratorium) भी शामिल है।

Tulsyan NEC का Q1 FY27 में घाटा दोगुना

कंसोलिडेटेड नेट लॉस: ₹21.41 करोड़
कंसोलिडेटेड रेवेन्यू: ₹146.70 करोड़

क्या हुआ?

Tulsyan NEC Ltd ने वित्त वर्ष 2027 (Q1 FY27) की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी को ₹21.41 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ है, जो कि पिछले साल की पहली तिमाही (Q1 FY26) में हुए ₹10.25 करोड़ के लॉस से काफी ज्यादा है। वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू भी गिरकर ₹146.70 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹257.30 करोड़ था।

क्यों आई इतनी गिरावट?

इस भारी गिरावट की मुख्य वजह कंपनी का पावर प्लांट (Power Plant) है, जो इस तिमाही में सिर्फ 4 दिन ही चालू रह पाया। प्लांट के बंद रहने से कंपनी के कामकाज और मुनाफे पर सीधा असर पड़ा। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) की शर्तों में भी बदलाव किया है, जिसके तहत कूपन पेमेंट (Coupon Payment) पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

आगे क्या उम्मीद?

कंपनी ने 12 मई 2026 को महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (Mahanadi Coalfields Limited) के साथ एक फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (Fuel Supply Agreement) किया है। इससे उम्मीद है कि कोयले की लागत कम होगी और कंपनी को डोमेस्टिक सप्लाई (Domestic Supply) का फायदा मिलेगा। NCDs पर 1 अप्रैल 2026 से 31 अगस्त 2026 तक के लिए कूपन पेमेंट मोरेटोरियम (Moratorium) दिया गया है, जिसका भुगतान बाद में किया जाएगा। इन NCDs की मैच्योरिटी डेट (Redemption Date) को बढ़ाकर 30 सितंबर 2027 कर दिया गया है।

जोखिम और चिंताएं

निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी अपने पावर प्लांट को कब तक पूरी क्षमता से दोबारा चालू कर पाती है। साथ ही, कोल इंडिया की सब्सिडियरी (Subsidiary) के साथ हुए नए एग्रीमेंट से लागत कितनी कम होती है, यह भी देखना अहम होगा। कर्ज़ चुकाने की कंपनी की क्षमता, खासकर मोरेटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद, एक बड़ा सवाल बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.