Siemens Energy India ने अपनी लोकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने के लिए **$300 मिलियन** के भारी-भरकम निवेश का ऐलान किया है। कंपनी J.P. Morgan इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी 'लोकल फॉर ग्लोबल' रणनीति को मजबूती देने पर जोर दे रही है।
भारी निवेश से बदलेगी तस्वीर
J.P. Morgan इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान Siemens Energy India ने खुलासा किया कि वे भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग को वर्ल्ड-क्लास हब बनाएंगे। यह कदम भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए उठाया गया है, जहां 2035-36 तक पीक पावर डिमांड 459 GW तक पहुंचने का अनुमान है।
'लोकल फॉर ग्लोबल' का विजन
कंपनी ने अपनी रणनीति के चार मुख्य पिलर तय किए हैं:
- Expand: हाई-वोल्टेज सबस्टेशन और HVDC सिस्टम में निवेश बढ़ाना।
- Modernize: पुरानी ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई तकनीक से बदलना।
- Stabilize: ग्रिड की विश्वसनीयता के लिए Statcom और स्टोरेज का उपयोग करना।
- Digitalize: ग्रिड की दक्षता सुधारने के लिए AI और डिजिटल एसेट मैनेजमेंट का एकीकरण।
भविष्य के आंकड़े
आने वाले वर्षों में देश का पावर सेक्टर बड़े बदलाव से गुजरेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2035-36 तक कुल जनरेशन कैपेसिटी 1,121 GW तक पहुंच सकती है, जिसमें नॉन-फॉसिल कैपेसिटी 786 GW रहने की उम्मीद है। इस बदलाव को संभालने के लिए ट्रांसमिशन सेक्टर में $250-300 बिलियन के निवेश की जरूरत है, जिसमें Siemens Energy की भूमिका काफी अहम होने वाली है।
