Sarda Energy & Minerals ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में इतिहास रच दिया है। कंपनी के नेट प्रॉफिट में **58%** का जबरदस्त उछाल आया है और यह **₹1,109 करोड़** के स्तर पर पहुंच गया है। साथ ही, कंपनी ने कर्ज में **86%** की भारी कटौती कर अपने बैलेंस शीट को बेहद मजबूत बना लिया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के नए आयाम
कंपनी के रेवेन्यू में भी 22.6% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है, जो ₹5,690 करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, EBITDA 44% बढ़कर ₹2,025 करोड़ हो गया है, जो पावर, माइनिंग और मेटल सेगमेंट के मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है। कंपनी के इतिहास में पहली बार बोर्ड ने 200% डिविडेंड देने की सिफारिश की है, जिस पर 24 सितंबर, 2026 को होने वाली 53वीं AGM में मुहर लगेगी।
क्यों मजबूत हुई कंपनी?
Sarda Energy अब पूरी तरह से एक 'एनर्जी-लेड इंटीग्रेटेड मॉडल' की ओर बढ़ रही है। सबसे बड़ा बदलाव SKS Power के अधिग्रहण के बाद आया है, जिसके मालिकाना हक पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग चुकी है। अब कंपनी अपनी क्षमता को 600 MW से बढ़ाकर 1,200 MW करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा, कंपनी का नेट डेट घटकर महज ₹215 करोड़ रह गया है, जिससे भविष्य के विस्तार के लिए कंपनी के पास पर्याप्त कैश उपलब्ध है।
भविष्य की योजनाएं और रिस्क
मैनेजमेंट ने रायपुर पैलेट प्लांट की क्षमता को 0.9 MTPA से बढ़ाकर 2.0 MTPA करने के लिए ₹500 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। साथ ही, अरुणाचल प्रदेश में 66 MW के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का अधिग्रहण रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कंपनी की बढ़ती रुचि को दिखाता है। हालांकि, निवेशकों को फॉरेस्ट क्लीयरेंस और कमोडिटी मार्केट की अस्थिरता जैसे रेगुलेटरी रिस्क पर नजर रखनी चाहिए।
