Oil India Ltd ने सिंगरौली कोलफील्ड में **272.14 वर्ग किमी** के कोल बेड मीथेन (CBM) ब्लॉक के लिए रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। कंपनी अब पारंपरिक तेल और गैस के अलावा अब अनकंवेंशनल हाइड्रोकार्बन पर भी फोकस बढ़ा रही है।
बड़ा कदम, बड़ी तैयारी
Oil India Ltd ने आधिकारिक तौर पर SR-ONHP-(CBM)-2026/1 ब्लॉक के लिए रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (RSC) पर मुहर लगा दी है। 15 अक्टूबर, 2026 को हुए इस एग्रीमेंट के बाद कंपनी अब सिंगरौली कोलफील्ड में एक्सप्लोरेशन एक्टिविटीज शुरू करने की तैयारी में है। यह प्रोजेक्ट सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसके जरिए घरेलू स्तर पर अनकंवेंशनल हाइड्रोकार्बन के उत्पादन को बढ़ाना है।
क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?
कंपनी के पोर्टफोलियो में अब तक पारंपरिक तेल और गैस ड्रिलिंग का दबदबा रहा है, लेकिन अब CBM की तरफ बढ़ना एक बड़े बदलाव का संकेत है। CBM एक क्लीन फ्यूल विकल्प माना जाता है और भारत की एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए इसका घरेलू उत्पादन बढ़ाना काफी महत्वपूर्ण है। इस ब्लॉक में कोल सीम्स 600 से 800 मीटर की गहराई पर हैं, जिनकी औसत मोटाई करीब 40 मीटर है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks to Watch)
CBM एक्सप्लोरेशन का काम काफी कैपिटल-इंटेंसिव होता है और इसमें जियोलॉजिकल चुनौतियां भी रहती हैं। हालांकि डेटा अभी सकारात्मक दिख रहा है, लेकिन इसे कमर्शियल लेवल पर प्रोडक्शन में बदलने में लंबा समय लग सकता है। तकनीकी चुनौतियां और रेगुलेटरी बाधाएं कंपनी के खर्च (CAPEX) और टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती हैं।
अगले कुछ दिनों में मार्केट की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी इस प्रोजेक्ट के लिए कितना कैपिटल एक्सपेंडिचर करने वाली है और ड्रिलिंग के शुरुआती परिणाम क्या निकलते हैं।
