Oil Country Tubular ने सितंबर तिमाही के लिए **₹12.39 करोड़** का नेट लॉस रिपोर्ट किया है। पिछली तिमाहियों के मुकाबले कंपनी के घाटे में सुधार हुआ है, साथ ही एसेट रिवैल्यूएशन से फ्यूचर में डेप्रिसिएशन कॉस्ट कम होने की उम्मीद है।
घाटे में आई सुधार की झलक
कंपनी ने सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए ₹12.39 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि इस दौरान रेवेन्यू ₹25.17 करोड़ रहा। अच्छी बात यह है कि कंपनी का घाटा पिछले जून तिमाही के ₹15.11 करोड़ और पिछले साल की समान अवधि के ₹21.57 करोड़ के मुकाबले काफी कम हुआ है।
क्यों अहम है यह बदलाव?
बोर्ड ने कंपनी की जमीन, बिल्डिंग और मशीनरी की वैल्युएशन को ₹208.78 करोड़ से बढ़ाकर ₹228.62 करोड़ करने की मंजूरी दी है। हालांकि इसका मौजूदा नतीजों पर असर नहीं है, लेकिन कंपनी ने एसेट्स की उपयोगी उम्र को दोबारा तय किया है। अब बिल्डिंग के लिए 8 साल और मशीनरी के लिए 6 साल की अवधि तय की गई है। इस बदलाव से दिसंबर 2026 की तिमाही से डेप्रिसिएशन खर्च कम होगा, जो कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी के रास्ते में मददगार साबित हो सकता है।
कॉरपोरेट हलचल
कंपनी ने 41,95,000 इक्विटी शेयरों में 'Optionally Convertible Preference Shares' (OCPS) का कन्वर्जन पूरा कर लिया है, जिसमें ₹55 प्रति शेयर का प्रीमियम भी शामिल है। इसके अलावा, TSERC के टैरिफ रिवीजन के कारण ₹74.35 लाख का वन-टाइम पावर कॉस्ट रिवर्सल भी हुआ है।
निवेशकों के लिए जोखिम और सलाह
तकनीकी तौर पर डेप्रिसिएशन में बदलाव के बावजूद कंपनी अभी भी स्टैंडअलोन आधार पर लॉस मेकिंग है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल इन अकाउंटिंग बदलावों पर न जाएं, बल्कि कंपनी की कोर ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर भी नजर रखें। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि घटे हुए डेप्रिसिएशन का असर अर्निंग्स पर कितना पड़ता है और कंपनी का टर्नअराउंड कब तक संभव है।
