ONGC ने CRISIL ESG Ratings & Analytics Ltd द्वारा जारी की गई एक अनसोलिसिटेड (Unsolicited) ESG रेटिंग रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उन्हें इस रेटिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया था और इसमें दिए गए आंकड़े कंपनी की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते।
रेटिंग पर क्यों मचा बवाल?
ONGC ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में स्पष्ट किया है कि उन्होंने CRISIL को कोई भी रेटिंग देने के लिए अधिकृत नहीं किया था। यह रेटिंग बिना किसी परामर्श के जारी की गई है। इस रिपोर्ट में CRISIL ESG स्कोर 57 और CRISIL कोर ESG स्कोर 65 दिया गया था, जिसे कंपनी ने भ्रामक बताया है।
गवर्नेंस और डेटा पर गंभीर सवाल
ONGC ने रिपोर्ट में बताए गए गवर्नेंस डेटा को गलत करार दिया है। विशेष रूप से इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की मीटिंग में उपस्थिति को लेकर की गई टिप्पणी पर कंपनी ने आपत्ति जताई है। ONGC के दावों के मुताबिक, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की बोर्ड और कमेटी मीटिंग्स में उपस्थिति 100% रही है, केवल एक बार छुट्टी को छोड़कर, जिसका इफेक्टिव अटेंडेंस रेट 92.30% बैठता है।
कंपनी का विजन
कंपनी ने अपने सस्टेनेबिलिटी प्रयासों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके 'बिज़नेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट' (BRSR) में सब कुछ पारदर्शी है। कंपनी का लक्ष्य 2038 तक Scope 1 और Scope 2 ऑपरेशनल एमिशन को नेट-जीरो तक लाना है।
फिलहाल, इस विवाद का कंपनी के फाइनेंशियल ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन निवेशकों को रेटिंग एजेंसी की अगली प्रतिक्रिया पर नज़र रखनी होगी।
