मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार वापसी करते हुए **₹1,931 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल के **₹51 करोड़** से काफी ज्यादा है। कंपनी के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में **$9.22/bbl** तक की छलांग के चलते यह उछाल आया है। इसके साथ ही, कंपनी ने प्रति शेयर **₹4** का अंतरिम डिविडेंड भी घोषित किया है।
Detailed Coverage
MRPL का शानदार वित्तीय प्रदर्शन: FY26 में ₹1,931 करोड़ का मुनाफा, डिविडेंड की भी घोषणा
मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹1,931 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष में दर्ज ₹51 करोड़ के PAT की तुलना में एक बड़ी छलांग है।
क्या रहा खास?
कंपनी ने बताया कि FY 2025-26 के लिए उसका राजस्व ₹1,05,155 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹1,09,280 करोड़ से मामूली 3.78% कम है। हालांकि, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में भारी उछाल देखा गया, जो ₹113 करोड़ से बढ़कर ₹4,022 करोड़ हो गया।
मुनाफे का राज: बेहतर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन
मुनाफे में इस भारी बढ़ोतरी का मुख्य कारण ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) का लगभग दोगुना होकर $9.22 प्रति बैरल (bbl) हो जाना है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह मार्जिन $4.45/bbl था। यह सुधार कंपनी की बेहतर परिचालन दक्षता और रिफाइंड उत्पादों के लिए अनुकूल बाजार स्थितियों को दर्शाता है।
शेयरधारकों को मिलेगा फायदा
कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर ₹4 का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है, जो कंपनी के मजबूत वित्तीय स्वास्थ्य और शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आगे क्या?
MRPL अपने मार्केटिंग और रिटेल सेगमेंट का विस्तार कर रहा है। वित्तीय वर्ष के दौरान 85 नए रिटेल आउटलेट खोले गए, जिससे कुल आउटलेट की संख्या 252 हो गई है। आंध्र प्रदेश जैसे नए बाजारों में विस्तार भविष्य में राजस्व बढ़ाने में मदद करेगा। कंपनी नई ऊर्जा पहलों पर भी काम कर रही है।
चिंता का विषय: बोर्ड की गवर्नेंस
हालांकि, कंपनी को बोर्ड संरचना से संबंधित हालिया गैर-अनुपालन का सामना करना पड़ा है। मार्च 2026 के अंत में स्वतंत्र निदेशकों की संख्या में कमी के कारण BSE और NSE से जुर्माना लगाया गया था। MRPL नए निदेशकों की नियुक्ति पर काम कर रहा है, लेकिन इस गवर्नेंस मुद्दे पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। इसके अलावा, वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव जैसे उद्योग-व्यापी जोखिम भी बने हुए हैं।
