Lords Chloro Alkali ने राजस्थान के लूनकरनसर में **14.5 MW** का कैप्टिव सोलर पावर प्लांट शुरू कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी की कुल रिन्यूएबल कैपेसिटी अब **47 MW (DC)** हो गई है, जिससे ग्रिड पर निर्भरता कम होगी और बिजली की लागत में बड़ी बचत की उम्मीद है।
सोलर पावर में बड़ी छलांग
कंपनी ने राजस्थान के बीकानेर जिले के लूनकरनसर में अपनी नई सोलर परियोजना को सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया है। इस प्लांट की खासियत यह है कि इसमें 14.5 MW (AC) सोलर ऐरे के साथ 1.672 MWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) भी लगाया गया है। यह तकनीक सौर ऊर्जा की अनिश्चितता को दूर कर ग्रिड में स्टेबिलिटी बनाए रखने में मदद करेगी।
क्यों अहम है यह कदम?
क्लोरो-अल्कली मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बिजली की खपत लागत का एक बड़ा हिस्सा होती है। अपनी खुद की बिजली पैदा करने से कंपनी अब महंगी ग्रिड बिजली से छुटकारा पा सकेगी। मैनेजमेंट के मुताबिक, इस नए प्लांट के जुड़ने से कंपनी के रिन्यूएबल एनर्जी मिक्स में करीब 40% का इजाफा हुआ है, जो भविष्य में ऑपरेशनल मार्जिन को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
निवेशकों के लिए संकेत
आने वाली तिमाही के नतीजों में निवेशकों को नजर रखनी चाहिए कि पावर और फ्यूल कॉस्ट में कितनी कमी आती है। जैसे-जैसे कंपनी अपनी कैप्टिव क्षमता का इस्तेमाल बढ़ाएगी, ग्रिड से बिजली खरीदने की जरूरत कम होगी, जिसका सीधा फायदा कंपनी की बॉटम-लाइन (Bottom-line) पर दिख सकता है।
