Larsen & Toubro: कंपनी के हाथ लगा बड़ा जैकपॉट, ONGC से मिला **₹5,000 करोड़** तक का बड़ा ऑर्डर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Larsen & Toubro: कंपनी के हाथ लगा बड़ा जैकपॉट, ONGC से मिला **₹5,000 करोड़** तक का बड़ा ऑर्डर

Larsen & Toubro के Energy Hydrocarbon Offshore डिविजन ने ONGC से एक 'Large' प्रोजेक्ट हासिल किया है। Ratna–I और NLM-14 फील्ड्स के विकास के लिए मिले इस EPCIC कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू **₹2,500 करोड़ से ₹5,000 करोड़** के बीच है।

बड़ा ऑर्डर और काम का दायरा

Larsen & Toubro (L&T) की Energy Hydrocarbon Offshore ब्रांच को यह कॉन्ट्रैक्ट ONGC के रत्ना-I और NLM-14 एसेट के एडिशनल डेवलपमेंट के लिए मिला है। यह प्रोजेक्ट भारत के वेस्ट कोस्ट पर स्थित है। कंपनी इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन, इंस्टॉलेशन और कमिशनिंग (EPCIC) का काम संभालेगी।

क्या-क्या होगा इस प्रोजेक्ट में?

यह प्रोजेक्ट काफी जटिल है और इसमें 3 नए वेल-हेड प्लेटफॉर्म और 1 राइजर प्लेटफॉर्म का इंस्टॉलेशन शामिल है। इसके अलावा, L&T समुद्र के नीचे पाइपलाइन और केबल बिछाने के साथ-साथ मौजूदा ऑफशोर सुविधाओं में जरूरी ब्राउनफील्ड मोडिफिकेशन का काम भी करेगी। यह कदम ONGC के लिए अपने पुराने एसेट्स से प्रोडक्शन बढ़ाने की दिशा में अहम है।

मैनेजमेंट का क्या कहना है?

L&T Energy Hydrocarbon Offshore के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड, पार्थसारथी चटर्जी ने बताया कि यह प्रोजेक्ट भारत के ऑफशोर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसी जटिल इंजीनियरिंग परियोजनाओं को अंजाम देना L&T की मुख्य ताकत रही है।

निवेशकों के लिए टेकअवे

इस नए ऑर्डर के साथ L&T की ऑर्डर बुक और भी मजबूत हो गई है। निवेशकों के लिए यह लंबी अवधि में रेवेन्यू विजिबिलिटी बढ़ाने वाला कदम है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी कितनी कुशलता से इसे तय समय में पूरा करती है और आने वाली तिमाहियों में यह रेवेन्यू में कितना योगदान देता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.